सूर्य चिकित्सा पद्धति के द्वारा इन रोगों से मिल सकता है आपको निजात

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रिपोर्ट – सौम्या

ब्यूरो रिपोर्ट। सूर्य को जल देने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, लेकिन कभी आप सबने यह जानने की कोशिश की है कि आखिर क्यों दिया जाता है सूर्य को जल? जल देने का क्या प्रभाव पड़ता है मानव शरीर पर? आइये आज हम आपको बताते हैं इसका पौराणिक रहस्य क्या है। सूर्य की किरणों से हमें कैसे कैसे लाभ मिलते हैं, इसके लिए आपको ये पूरी पोस्ट को पढ़ना बहुत आवश्यक है। 

आपको बता दें कि सूर्य स्वास्थ्य और जीवन शक्ति का भण्डार है। मनुष्य सूर्य के जितने अधिक सम्पर्क में रहेगा उतना ही अधिक स्वस्थ रहेगा। इसलिए कहा जाता है कि हर दिन कुछ देर सूर्य की किरणों को अपने ऊपर पड़ने देना चाहिए। उससे आपको बहुत फायदा मिलता है। जो लोग अपने घर को चारों तरफ से खिड़कियों से बन्द करके रखते हैं और सूर्य के प्रकाश को घर में घुसने नहीं देते वे लोग सदा रोगी बने रहते हैं। जहां सूर्य की किरणें पहुंचती हैं, वहां रोग के कीटाणु स्वत:मर जाते हैं और रोगों का जन्म ही नहीं हो पाता। सूर्य अपनी किरणों द्वारा अनेक प्रकार के आवश्यक तत्वों की वर्षा करता है और उन तत्वों को शरीर में ग्रहण करने से असाध्य रोग भी दूर हो जाते हैं। सूर्य पृथ्वी पर स्थित रोगाणुओं को नष्ट करके प्रतिदिन रश्मियों का सेवन करने वाले व्यक्ति को दीर्घायु भी प्रदान करता है।

सूर्य की रोग नाशक शक्ति के बारे में अथर्ववेद के एक मंत्र में स्पष्ट कहा गया है कि सूर्य औषधि बनाता है, विश्व में प्राण रूप है तथा अपनी किरणों  द्वारा जीवों का स्वास्थ्य ठीक रखता है।अथर्ववेद में कहा गया है कि सूर्योदय के समय सूर्य की लाल किरणों के प्रकाश में खुले शरीर बैठने से हृदय रोगों तथा पीलिया के रोग में लाभ होता है।प्राकृतिक चिकित्सा में आन्तरिक रोगों को ठीक करने के लिए भी नंगे बदन सूर्य स्नान कराया जाता है। आजकल जो बच्चे पैदा होते ही पीलिया रोग के शिकार हो जाते हैं उन्हें सूर्योदय के समय सूर्य किरणों में लिटाया जाता है, जिससे अल्ट्रा वायलेट किरणों के सम्पर्क में आने से उनके शरीर के पिगमेन्ट सेल्स पर रासायनिक प्रतिक्रिया प्रारंभ हो जाती है, और बीमारी में लाभ होता है, डाक्टर भी नर्सरी में कृत्रिम अल्ट्रावायलेट किरणों की व्यवस्था लैम्प आदि जला कर भी करते हैं।

सूर्य को कभी हल्दी या अन्य रंग डाल कर जल दिया जाता है, जल को हमेशा अपने सिर के ऊपर से सूर्य और अपने ह्रदय के बीच से छोड़ना चाहिए। ध्यान रहे की सूर्य चिकित्सा दिखता तो आसान है पर विशेषज्ञ से सलाह लिये बिना शुरू नहीं करना चाहिए। जैसा की हम जानते हैं कि सूर्य की रोशनी में सात रंग शामिल हैं और इन सब रंगो के अपने अपने गुण और लाभ है। आइये जानते हैं वो कौन से रंग हैं जिससे हमे क्या -क्या फायदे हो सकते हैं।

लाल रंग: यह बुखार, दमा, खांसी, मलेरिया, सर्दी, ज़ुकाम, सिर दर्द और पेट के विकार आदि में लाभ कारक है।हरा रंग: यह स्नायुरोग, नाडी संस्थान के रोग, लिवर के रोग, श्वास रोग आदि को दूर करने में सहायक है। पीला रंग: चोट ,घाव रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप, दिल के रोग, अतिसार आदि में फ़ायदा करता है।नीला रंग: अपच, मधुमेह आदि में लाभकारी है।बैंगनी रंग: श्वास रोग, सर्दी, खांसी, मिर्गी, दांतों के रोग में सहायक है।नारंगी रंग: वात रोग, अम्लपित्त, अनिद्रा, कान के रोग दूर करता है।आसमानी रंग: स्नायु रोग, यौनरोग, सरदर्द, सर्दी- जुकाम आदि में सहायक है।

सूरज का प्रकाश रोगी के कपड़ों और कमरे के रंग के साथ मिलकर रोगी को प्रभावित करता है।अतः दैनिक जीवन मे हम अपने जरूरत के अनुसार अपने परिवेश एवं कपड़ों के रंग इत्यादि में  फेरबदल करके बहुत सारे फायदे उठा सकते हैं।