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अक्षय नवमी: आंवला वृक्ष को पूजने से मिलेगा ये लाभ, जानिए क्या है पूजा विधि 

ब्यूरो डेस्क। संतान, सुख प्राप्ति का पर्व अक्षय नवमी 5 नवम्बर को है। कार्तिक शुक्ल नवमी सोमवार को सायंकाल 6:25 से प्रारंभ होगी और 5 नवंबर को दिनभर रहेगी। प्रख्यात ज्योतिषाचार्य विमल जैन के अनुसार कार्तिक शुक्ल की नवमी को अक्षय नवमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन द्वापर युग की शुरुआत मानी गयी है। इस दिन स्नान-दान और दशर्न-पूजन से अमोघ व अक्षय फल की प्राप्ति होती है। इस बार फिर धनिष्ठा नक्षत्र में अक्षय नवमी का योग मंगलवार को बन रहा है। चंद्रमा उस दिन कुंभ राशि में होंगे। इस वर्ष के राजा शनि है इसलिए जो पूजन होगा वह विशेष लाभकारी होगा। अयोध्या और मथुरा में अक्षय नवमी के दिन परिक्रमा करने से विशेष लाभ होगा। इस दिन पूजन करने से ब्रहम हत्या जैसे महा पाप मिट जाते है। 

हालांकि अक्षय नवमी का मान 6 नवंबर प्रात: 8:09 तक रहेगा। इस बाबत ज्योतिषाचार्य विमल जैन का कहना है कि अक्षय नवमी का पूनज संतान प्राप्ति, परिवार की सुख समृद्धि, शांति के लिए की जाती है। यह पूजा दिनांक 5 नवंबर को आंवले के पेड़ के नीचे की जाएगी। आंवले के पेड़ को साक्षात विष्णु माना गया है। कहा गया है कि जिस इच्छा के साथ पूजन किया जाता वह इच्छा पूर्ण होती है इसलिए इस नवमी को इच्छा नवमी भी कहते हैं। आंवला वृक्ष के नीचे अक्षय नवमी के दिन भोजन बनाकर खाने का विशेष महत्व है। भोजन में खीर, पूड़ी या मिष्ठान्न हो सकता है।
 
हिमाद्री देवी पुराण के अनुसार कार्तिक शुक्ल नवमी को व्रत पूजा तर्पण तथा अनादि दान करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है। इस बार अक्षय नवमी 4 नवंबर को रात्रि 6:25 से प्रारंभ होकर 5 नवंबर को संपूर्ण दिन रात्रि में व्याप्त है तथा दिनांक 6 नवंबर को नवमी का मान प्रात: 8:0 9 तक है। इस दिन किया हुआ पूजा पाठ और दिया हुआ दान शुभ माना गया है। इस दिन कार्तिक शुक्ल नवमी को ही धात्री नवमी और कुष्मांडा नवमी भी कहते हैं। अत: इस दिन प्रात: स्नानादि करके धात्री वृक्ष आंवला के नीचे पूर्वा मुख बैठकर ओम धात्री नम: से आवाह्न करें और विधि विधान से पूजन करें जल गंध आदि पुष्प चढ़ाते हुए पंचोपचार पूजन करके देव ऋषि पितृ मानवा अक्षय नवमी को गुप्त दान देने का भी प्रावधान है।
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