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VARANASI: धनतेरस पर इस अवधिकाल में करें पूजा, होंगे ये लाभ

वाराणसी। धनतेरस का त्योहार इस बार 25 अक्टूबर को मनाया जायेगा। पांच पर्वों वाली दीपावली की शुरुआत धनतेरस से ही हो जाती है। धनतेरस के दिन महालक्ष्मी के साथ ही कुबेर का पूजन भी किया जाता है। ज्योतिषविद विमल जैन के अनुसार कुबेर के वरदान से घर में अपार धन के भंडार लग लगते हैं। धनतेरस पर विभिन्न धातुओं से बने बर्तन, सोना, चांदी खरीदने का बड़ा महत्व होता है। इस दिन धातु का सामान खरीदना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यताएं हैं कि धनतेरस पर दिन के समय या संध्याकाल में अगर खरीदारी की जाए तो तमाम मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 

क्यों मनाते हैं धनतेरस 

धनतेरस कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन समुद्र मंथन के दौरान, अमृत का कलश लेकर धनवंतरी प्रकट हुए थे। तभी से इस दिन को धनतेरस के रूप में मनाया जाने लगा है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, धनवंतरी के प्रकट होने के ठीक दो दिन बाद मां लक्ष्मी प्रकट हुईं थीं। यही कारण है कि हर बार दिवाली से दो दिन पहले ही धनतेरस मनाया जाता है। इस दिन को कुबेर का दिन भी माना जाता है और धन संपन्नता के लिए कुबेर की पूजा की जाती है।

धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त

धनतेरस पूजा मुहूर्त- शाम 07.08 बजे से रात 8.14 बजे तक
अवधि- 1 घंटा 06 मिनट
प्रदोष काल- शाम 5.39 से 8.14 बजे तक

धनतेरस पर ऐसे करें पूजा 
धनतेरस पर शाम के वक्त उत्तर की ओर कुबेर और धनवंतरी की स्थापना करनी चाहिए। दोनों के सामने एक-एक मुख का घी का दीपक जरूर जलाना चाहिए। धनतेरस के दिन कुबेर को सफेद मिठाई और धनवंतरी को पीली मिठाई चढ़ाना भी शुभ माना जाता है। इस दिन सबसे पहले ॐ ह्रीं कुबेराय नमः का जाप करना इसके बाद धनवंतरी स्तोत्र का पाठ करने से बहुत लाभ होता है। पूजा के बाद दीपावली पर कुबेर को धन स्थान पर और धनवंतरी को पूजा स्थान पर स्थापित करें।

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