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भरत मिलाप: विरोध के साथ भगवान का रथ खींच यादव समाज ने परंपराओं का किया निर्वहन

वाराणसी। बात यदि धर्म ग्रंथों की करे तो दीपावली पर्व प्रभु राम के अयोद्ध्या आने की ख़ुशी में मनाया गया था,लेकिन शिव की नगरी काशी में दशहरे के दूसरे दिन के बाद ही प्रभु श्री राम के चारों भाइयों का मिलन होता है। यह लीला कई दूसरे मायने में भी अपनी अलग पहचान रखता है।सबसे बड़ी बात यह है कि मात्र 5 मिनट की होने वाली इस लीला को देखने के लिए लोग घंटों इंजतार करते है भक्तों की भारी भीड़ इस बात का श्रोतक है कि आज के इस युग में अभी भी भक्त अपने भगवान को सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार है। ख़ास बात यह कि इस बार भरत मिलाप में भगवान का रथ खींचने वाले यादव बंधुओं ने हाथों पर काली पट्टी बांध पुष्पेन्द्र यादव एनकाउंटर को फर्जी करार देते हुए सरकार के नीतियों का विरोध भी किया है।

क्या है इतिहास
लगभग पांच 500 वर्ष पहले संत तुलसीदास जी के शरीर त्यागने के बाद उनके समकालीन संत मेधा भगत काफी विचलित हो उठे। मान्यता है कि उन्हें स्वप्न में तुलसीदास जी के दर्शन हुए और उसके बाद उन्हीं के प्रेरणा से उन्होंने इस रामलीला की शुरुआत की। दशहरे के दूसरे दिन काशी के नाटीइमली के मैदान में आयोजित इस भरत मिलाप में प्रभु श्रीराम और चारों भाइयों के मिलने पर लगता है, मानों स्वर्ग से भगवान उतर आये हो और इस क्षण को अविस्मरणीय बनाने के लिए ही यहाँ लाखों की भीड़ होती है।

लीला का समय
शाम को लगभग चार बजकर चालीस मिनट पर जब अस्ताचल गामी सूर्या की किरणेभरत मिलाप मैदान के एक निश्चित स्थान पर पड़ती हैं तब लगभग पांच मिनट के लिए माहौल थम सा जाता है। एक तरफ भरत और शत्रुघ्न अपने भाईयों के स्वागत के लिए जमीन पर लेट जाते है तो दूसरी तरफ राम और लक्षमण वनवास ख़त्म करके उनकी और दौड़ पड़ते हैं। चारों भाईयों के मिलन के बाद जय जयकार शुरू हो जाती है। रवायत के अनुसार फिर चारों भाई रथ पर सवार होते हैं और यदुवंशी समुदाय के लोग उनके रथ को उठाकर चारो और घुमाते हैं। इस लीला को देखने के लिए क्या बच्चा, क्या बुजुर्ग सबके मन में केवल एक ही श्रद्धा भगवान का दर्शन।

क्या कहते हैं यादव बंधू
इस बार भरत मिलाप में भगवान का रथ खींचे जाने को लेकर यादव समाज के कुछ लोगों ने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया था, जिसके बाद भक्तों में उहापोह की स्थिति बनी हुई थी कि अगर यादव बंधुओं ने परंपरा का निर्वहन नहीं किया तो जाने क्या होगा। हालांकि इन सबके विपरीत जाते हुए यादव समाज के युवाओं ने परंपरा का निर्वहन करते हुए भगवान का रथ खींचा,लेकिन इसके साथ ही हाथों पर काली पट्टी बांध अपना विरोा भी दर्ज कराया। इनका कहना था कि जिस प्रकार से योगी सरकार यादव समाज को टॉरगेट कर काम कर रही है,उससे इनके समाज में आक्रोश व्याप्त है। खासतौर पर पुष्पेन्द्र यादव का एनकाउंटर जिस तरह से किया गया वो फर्जी रहा। इस​लिए सारा यादव समाज सरकार के नीतियों का विरोध कर रहा है।

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