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प्रशासन की खुली पोल, दो साल में ही पुल में हो गया होल

वाराणसी। सरकारें बदली, लेकिन नहीं बदला कार्यशैली और इसका परिणाम आज देखने को भी मिल गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में किये जा रहे विकास कार्यों को लेकर वाराणसी प्रशासन कितना सजग है, इसकी बानगी आज सामने घाट से रामनगर को जोड़ने वाले ओवरब्रिज पर देखने को मिली। दो साल के भीतर ही इस ओवरब्रिज में एक बड़ा होल हो गया है।  

बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने शासन काल में सामनेघाट से रामनगर को जोड़ने वाले पुल की नींव रखी थी। पूर्व के अखिलेश सरकार में इस पुल का निर्माण शुरू किया गया था, लेकिन मोदी सरकार ने पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के सामनेघाट से रामनगर को जोड़ने वाले पुल में बड़ा गढ्ढा हो गया है। दो साल पहले ही इस पुल का निर्माण हुआ था। इस पुल का उद्घाटन पीएम मोदी ने ही किया था। दो साल के भीतर ही इस पुल ने सरकार द्वारा मानक पर किये जाने वाले कामों पर सवाल खड़ा कर दिया है।

दरअसल सामनेघाट से रामनगर को जोड़ने का काम ये पुल करता है। ये पुल 97 करोड़ की लागत में बनकर दो साल पहले तैयार हुआ था। खुद पीएम मोदी ने इस पुल का उद्घाटन किया था। विगत कुछ दिनों से रात में हो रही मूसलाधार बारिश ने इस पुल की असलियत सबके सामने लाकर रख दी है।

इस पूरे मामले पर कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय ने कहा कि प्रधानमंत्री को खुश करने के लिए उनके प्रतिनिधि के द्वारा जल्दबाजी में पुल बना दिया, जिसका खामियाजा वाराणसी की जनता को देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय में जितने भी काम हुए वो सब सही तरीके से हुए हैं। बीजेपी सिर्फ लोगों को काम के नाम पर बेवकूफ बना रही है।

हालांकि इस गढ्ढे के मरम्मत का कार्य किया जा रहा है, लेकिन दो साल के भीतर ही इस तरीके से पुल में हुए गढ्ढे ने सवाल खड़ा कर दिया है। ज्ञात हो कि इस पुल के निर्माण के दौरान ही गॉर्डर के गिरने से 40 मजदूर इसमें दो घंटों तक फंसे थे, जिनको कड़ी मशक्त के बाद करें के द्वारा निकाला गया था।

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