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…तो वज़ीर को नजीर नहीं भाया! ओह, इसलिए ‘प्रभाकर’ को मुरादाबाद का ‘चौधरी’ बनाया

वाराणसी। पोस्टिंग के बाद से ही सत्ताधारियों के आंखों की किरकिरी बने जिले के कप्तान प्रभाकर चौधरी अंततः हटा दिये गयें।कहने को तो यह एक सामान्य तबादला है। मगर सच तो यही है कि तबादले की मुख्य वजह रहा लंका थाने के पुलिसकर्मियों औऱ सत्ताधारी दल के नेताओं का विवाद। क्योंकि सूत्रों की माने तो प्रभाकर चौधरी उस विवाद में पुलिसकर्मियों पर निलंबन जैसी कार्रवाई के मूड में नहीं थें। मगर उच्चाधिकारियों के दवाब में उन्हें यह करना पड़ा। ऐसे में सत्ताधारी दल के नेताओं को आलाकमान के सामने कप्तान को “बीजेपी पदाधिकारीयों की नहीं सुनते” टॉइप छवि बनाने का मौका मिल गया। अंदरखाने में चार दिनों से प्रभाकर चौधरी के ट्रांसफर की चर्चा चल रही थी, जिसका परिणाम मंगलवार रात आ ही गया।

आज से आठ माह पूर्व जिले की कप्तानी संभालने वाले आईपीएस प्रभाकर चौधरी की छवि बेहद ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी की है। अपनी इसी छवि के कारण यह अक्सर नेताओं के आंखो में चुभने लगते हैं। जिले में पदस्थ होते ही कप्तान ने सबसे पहले थानाक्षेत्रों में बिकने वाले अवैध मादक पदार्थों की बिक्री पर अंकुश लगाया। कप्तान के तेवर से वाकिफ़ मातहतों ने अपनी ऊपरी कमाई,यहां तक कि एग्जाई तक से तौबा तौबा कर लिया था। पैरवी के दम पर थाने चौकी का प्रभार पाने वाले शांति से पड़े रहें। या खुद का गैर जनपद तबादला करवा लिया। ट्रांसफर पोस्टिंग, गलत पैरवी प्रभाकर चौधरी किसी की नहीं सुनते यह बात मंत्री विधायक तक जानते थें। मने ‘वज़ीरे आला'(मुख्यमंत्री) के मंशा अनुरूप प्रभाकर नजीर हैं। मगर स्थानीय वजीरों की आँख में खटकने के लिए यह बहुत है। खैर देखा जाय तो प्रभाकर चौधरी नौकरी का सबसे लंबा कार्यकाल बनारस ही रहा। मगर कोरोनाकाल में प्रभाकर चौधरी का ट्रांसफर बहुत कुछ बता जाता है।

नए कप्तान अमित पाठक की बात की जाय तो इन्हें बेहद तेजतर्रार पुलिस अधिकारी माना जाता है। इनके खाते में कई ऐसी घटनाओं का पर्दाफाश रहा जो बड़ी और गम्भीर घटनाएं रहीं। जिसमें
बिजनौर में एनआइए अधिकारी तंजील अहमद और उनकी पत्नी की हत्या का अनावरण और बिहार के चर्चित डॉक्टर दंपति अपहरण कांड और सकुशल बरामदगी सहित बहुचर्चित ‘लाईक करो पैसे पाओ’ का झांसा देकर 3700 करोड़ ठगने वाली कंपनी के मालिक अनुभव मित्तल, उसके सीईओ श्रीधर और तकनीकी प्रमुख महेश को एसटीएफ के एसएसपी रहते गिरफ्तार किया था। 650 करोड़ रुपये भी बरामद किए थें। फिलहाल नवनियुक्त कप्तान अमित पाठक की कार्यशैली,कार्यकुशलता जिले में कैसी और क्या होगी,यह आने वाला वक्त बताएगा।

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