धर्म / ज्योतिष

इस होली इन रंगों का प्रयोग होगा आपके लिए भाग्यशाली, ये है पौराणिक मान्यता

ब्यूरो रिपोर्ट। 10 मार्च को होली का त्योहार है। ये रंगों का त्योहार है, जिसे हर कोई बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाता है। आज हम आपको बताएंगे कि इस होली राशि अनुसार किन रंगों का इस्तेमाल कर आप अपनी किस्मत को चमका सकते हैं, लेकिन उसके पहले होली के बारे कुछ ऐसी जानकारी भी आप को बताएंगे, जिन्हें शायद ही सभी जानते होंगे। कहते हैं कि ये एक ऐसा त्योहार है, जिसमें हर कोई अपने गिले शिकवे दूर कर होली के रंगों में रंग जाता है। पूरे देश में होली की धूम अलग ही होती है। आज हम आपको इस पर्व से जुड़ी कुछ खास जानकारी देने जा रहे हैं, जिसे कम ही लोग जानते होंगे। इसी के साथ उन रंगों के बारे में भी बताएंगे जिनका इस होली प्रयोग करने से आपको मिलेगा लाभ।

हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होली का पर्व मनाया जाता है और इस साल ये खास दिन 10 मार्च दिन मंगलवार को पड़ रहा है। क्या आपको इसके पौराणिक तथ्यों की पूरी जानकारी है, नहीं ना तो चलिए हम आपको आज बताते हैं। प्राचीनकाल में होली को होलका के नाम से जाना जाता था और इस दिन आर्य नवात्रैष्टि यज्ञ करते थे। इस पर्व में होलका नामक अन्य से हवन करने के बाद उसका प्रसाद लेने की परंपरा रही है। होलका अर्थात खेत में पड़ा हुआ वह अन्न जो आधा कच्चा और आधा पका हुआ होता है, संभवत: इसलिए इसका नाम होलिका उत्सव रखा गया होगा। प्राचीन काल से ही नई फसल का कुछ भाग पहले देवताओं को अर्पित किया जाता रहा है।

होलिका दहन
इस दिन के अनुसार असुर हरिण्याकश्यप की बहन होलिका का दहन हुआ था और प्रहलाद जोकि उनकी गोद में थे वे बच गए थे। इसी की याद में होलिका दहन किया जाता है। यह होली का प्रथम दिन होता है। संभव: इसी कारण इसे होलिकात्वस भी कहा जाता है।

कामदेव को किया था भस्म 
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने कामदेव को भस्म करने के बाद जीवित भी किया था। एक अन्य मान्यता है कि इसी दिन राजा पृथु ने अपने राज्य के बच्चों को बचाने के लिए राक्षसी ढुंढी को लकड़ी जलाकर आग से मार दिया था, इसीलिए होली को ‘वसंत महोत्सव’ या ‘काम महोत्सव’ भी कहा जाता है।

फाग उत्सव 
बता दें कि त्रेतायुग के प्रारंभ में भगवान विष्णु ने धूलि वंदन किया था, इसकी याद में ही धुलेंडी मनाई जाती है। होलिका दहन के बाद ‘रंग उत्सव’ मनाने की परंपरा भगवान श्रीकृष्ण के काल से प्रारंभ हुई। तभी से इसका नाम फगवाह हो गया, क्योंकि यह फागुन माह में आती है। कृष्ण ने राधा पर रंग डाला था। इसी की याद में रंग पंचमी मनाई जाती है। श्रीकृष्ण ने ही होली के त्योहार में रंग को जोड़ा था।

ये तो हो गयी होली के बारे में बातें जिन्हें बहुत कम ही लोगों को मालूम होगा। किस रंग के इस्तेमाल से सवेरे की किस्मत होली के पावन पर्व को कैसे बनाएं और अधिक भाग्यशाली। होली पर कौन सा रंग चमकाएगा आपकी किस्मत। किस रंग से करना है परहेज इसकी जानकारी ज्योतिषविद विमल जैन बता रहे हैं।

जिनकी तिथि किसी भी माह की 1,10,19,28 हो उनके लिए लाल, गुलाबी और केसरिया रंग लाभकारी होगा। जिनकी जन्मतिथि 2,11,20 है उन्हें सफेद, भूरा और ग्रे रंग का इस्तेमाल करना चाहिए। जिनकी जन्मतिथि 3 ,12, 21, 30 है वो  सभी प्रकार के पीला सुनहरा पीला रंग प्रयोग में ला सकते हैं। वहीं 4, 13, 22, 31 के लिए सभी प्रकार के चटकीले मिले-जुले रंगों का प्रयोग लाभकारी होगा। 5,14,23 के लिए धानी, फिरोजी, सफेद अथवा आसमानी नीला। जिनकी 9,18,27 है उनको लाल,गुलाबी और नारंगी रंगों का इस्तेमाल करना लाभदायी होगा।

 

किन रंगों से करना है परहेज 
मेष-काला, नीला एवं हरा। वृषभ -हरा, काला, नीला। मिथुन- लाल, नारंगी, पीला। कर्क-हरा, काला,नीला। सिंह-नीला, काला, हरा। कन्या- पीला, लाल, नारंगी। तुला-हरा,पीला, काला। वृश्चिक-नीला हरा। धनु-हरा, काला। मकर -नीला। कुम्भ -नारंगी, लाल। मीन-हरा, काला, नीला। इन रंगों का प्रयोग करके अपने दैनिक प्रयोग में आने वाले वस्तुओं और तथा परिधान में नहीं करना चाहिए ज्योतिष की मान्यता के मुताबिक निश्चित रंगों का प्रयोग करके हम अपने को और अधिक ऊर्जावान तथा भाग्यशाली बना सकते हैं।

 

 

 

 

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