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Twenty-Twenty! तुमसे तो थी बहुत उम्मीद, आखिर क्यों किया इतना निराश

रिपोर्ट- सौम्या चौरसिया

ब्यूरो रिपोर्ट। हर साल लोगों को नए साल का बेसब्री से इंतज़ार रहता है और लोग बहुत ही हर्षोउल्लास के साथ नया साल मनाते हैं, लेकिन किसी को क्या मालूम था कि साल 2020 सभी के लिए इतना घातक साबित होगा। करीब आधा साल खत्म होने को है,वहीं देश और देशवासी लगातार हर दिन मुसीबतों से जूझते नजर आ रहे हैं। पहले सीएए और एनआरसी का मुद्दा गरमाया, जिसको लेकर दिल्ली में भयंकर हिंसा और आगजनी तक हुई। अभी ये मामला पूरी तरह से शांत भी नहीं हुआ था कि कोरोना नामक महामारी ने देश में दस्तक दे दी। लेकिन भारत के लोगों के बारे में एक बात काफी प्रचलित है कि वो किसी भी कीमत पर हार नहीं मानते और आखिरी दम तक मुसीबतों से लड़ते रहते हैं। शायद यही वजह है कि आज देश और देशवासी हर मुसीबतों को झेलते हुए भी अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के बदौलत खड़े हैं।

चीन के वुहान से शुरू हुआ कोरोना कई देशों को अपने चपेटे में ले चुका है। हालांकि कुछ एक देश कोरोना से युद्ध जीतकर कोरोना फ्री देश हो चुके हैं लेकिन भारत अभी भी कोरोना जैसे महामारी से जूझ रहा है। देश में पहला केस वुहान विश्वविद्यालय से केरल आये एक छात्र में 30 जनवरी को सरकार ने पुष्टि करके बताया था।  तब किसी को नहीं पता था कि कोविड-19 धीरे-धीरे करीब पूरे देश को ही अपने जद में ले लेगा। शुरूआती दौर में कोरोना का ग्राफ धीमी गति के साथ अपना पांव पसार रहा था मगर अब वही कोरोना तेजी से लोगों को अपने जद में लेता दिखाई दे रहा है। वैसे सरकार ने अपनी तरफ से जितना हो सका हर उस जतन को लोगों को बचाने के लिए किया लेकिन कब तक ? अब अपनी सुरक्षा अपने ही हाथों में हैं आप जितनी सावधानी खुद से बरतेंगे उतने ही कोरोना से बचे रहेंगे। वैसे भी  अब तो शायद ये पूरा साल ही कोरोना से जंग लड़ते निकल जाने वाला है।  बात यहीं पर खत्म नहीं हुई  अभी सब कोरोना महामारी से लड़ ही रहे थे कि देश पर एक नई मुसीबत ने दस्तक दी और उस दस्तक का नाम अम्फान चक्रवाती तूफान था।

कोरोना काल में अम्फान की दस्तक ने भी बड़ी तबाही मचाई। सबसे ज्यादा इससे पश्चिम बंगाल प्रभावित हुआ। कोलकाता का तो बुरा हाल हो गया दो दिनों तक वहां लाइट की किल्लत रही। तूफान के झंझावतों से देश अभी निकला भी नहीं था कि पाकिस्तान से टिड्डियों का बड़ा दल भारत की तरफ तेज़ी से आने लगा,जिसका सीधा असर किसानों और उनके खेतों पर मंडराते खतरे के तौर पर दिखाई देने लगा।  इसमें भी सरकार ने किसानों की खेती को बचाने के लिए जो कर सकती थी उसको करने का प्रयास करती रही। तभी एक बार फिर महाराष्ट्र में निसर्ग तूफान की आहट सुनाई दी। खैर निसर्ग से जान माल को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ।

अगर हम साल के शुरुआत पर एक नजर डालते हैं तो शुरुआत से ही एक के बाद एक परेशानी देश में विपदा के रूप में खड़ी दिखाई देती चली गयी है। अभी ये तो साल के बीते आधे साल का हाल है। आगे का आधा साल देश के ऊपर कितना भारी या स्थिती में सुधार लेकर आएगा ये तो आने वाले आगे के समय में पता चलेगा। बहरहाल अभी तो सबको मिलकर कोरोना से जंग को जीतकर देश को जिताना है और एक बार फिर से भारत को पहले जैसे मदमस्त और अल्हड़ वाले जीवन में वापस लाना है। ये तभी संभव है जब हम सब सावधानी बरतेंगे और अपने आपको सुरक्षित रखने का पूरा प्रयास करेंगे।

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