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IUC पर TRAI का परामर्श पत्र PM मोदी के सपने को करेगा चकनाचूर : जियो

नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े उद्यमी मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो ने ट्राई के इंटरकनेक्टेड यूजर्स चार्ज (आईयूसी) परामर्श पत्र को मनमाना और गरीब विरोधी बताया है। साथ ही इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को चकनाचूर करने वाला बताया है।

जियो ने रविवार को कहा कि इंटरकनेक्टेड यूजर्स चार्ज (आईयूसी) को खत्म करने की सीमा के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ मनमानी, प्रौद्योगिकी विरोधी, कानूनी रूप से कमजोर, अनुचित और गरीब विरोधी है। जियो ने ट्राई पर निशाना साधते हुए कहा कि आईसीयू पर नियामक संस्था के मनाने रवैये से उसकी विश्वसनीयता संदेह के दायरे में है। इसके कारण दूरसंचार क्षेत्र के निवेशकों के भरोसे पर कुठाराघात होगा।

जियो ने कहा है कि आईयूसी की वजह से वह अन्य दूरसंचार कंपनियों को 13500 रुपये का भुगतान कर चुकी है। जियो का कहना है कि प्रधानमंत्री के सोच के अनुरूप डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर देश के हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन आईयूसी को बनाए रखने के कारण प्रधानमंत्री का डिजिटल इंडिया का सपना चकनाचूर हो जायेगा। कुछ टेलीकॉम ऑपरेटर चाहते हैं कि पुराना 2जी का पड़ा हुआ नेटवर्क बना रहे और देश के 47 करोड़ से ज्यादा ग्राहक जो 2जी नेटवर्क से जुड़े हैं डिजिटल क्रांति के लाभों से वंचित रह जाएं। कंसल्टेशन पत्र जारी कर ट्राई इन टेलीकॉम ऑपरेटरों के निहित स्वार्थ को बचाए रखना चाहती है।

जियो ने कहा कि कुछ ऑपरेटरों के पास 2जी नेटवर्क से 4जी में अपग्रेड न करने के अनेकों बहाने हैं। वह अपने 2जी ग्राहकों का विभिन्न तरीकों से शोषण कर रहे हैं। ये ऑपरेटर 2जी ग्राहकों से वॉयस कॉलिंग के पैसे वसूलते हैं, जबकि जियो के 4जी नेटवर्क पर यह नि:शुल्क है। खराब गुणवत्ता और ऊंची कीमतों के डेटा की वजह से यह 2ग्राहक डिजिटल सोसाइटी का हिस्सा भी नहीं बन पाते हैं। साथ ही प्रधानमंत्री के सपने ‘ईज ऑफ लिविंग’ यानी आराम से जीने के हक भी इससे बाधित होता है। आईयूसी पर ट्राई के कंसल्टेशन पेपर से उन ऑपरेटर्स को बल मिलेगा जो 2जी से 4जी में अपग्रेड करने में आनाकानी करते आ रहे हैं।

आईयूसी को जारी रखने के पक्ष में तर्क दिया जा रहा है कि कुछ टेलीकॉम कंपनियों की वित्तिय हालात काबू में नही है। इसलिए आईयूसी जारी रखना जरूरी है। रिलायंस जियो के मुताबिक इस तर्क में कोई दम नही है। आईयूसी की रकम इतनी बड़ी नहीं होती कि कई हजार करोड़ की कंपनियों की वित्तीय हालात पर इसका कोई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़े। रिलायंस जियो का कहना है कि वित्तीय हालात की बात करने वाली कंपनिया इसे एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल कर रहीं हैं। दरअसल वह नए निवेश से बचना और 2जी नेटवर्क को जारी रखना चाहती हैं।

रिलायंस जियो ट्राई के 18 सितंबर को आईयूसी जारी कंसल्टेशन पेपर का जबाव देते हुए कहा कि यह कंसल्टेशन पेपर जल्दबाजी में और बिना किसी सोच के जारी कर दिया गया है। ट्राई के अनदेखी की वजह से अगर आईयूसी को समाप्त करने में देरी की गई तो यह फ्री वॉयस कॉलिंग व्यवस्था को खत्म कर देगा, जो ग्राहक के लिए लाभप्रद नहीं होगा।

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