आज है भारत रत्न से सम्मानित अटल, मालवीय का जन्मदिन 

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रिपोर्ट – अंकित सिंह 

डेस्क रिपोर्ट। आज पूरा विश्व क्रिसमस पर्व मना रहा है। इसके साथ ही आज देश पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वायपेयी और भारत में शिक्षा की लौ जलाने वाले मदनमोहन मालवीय,इन दोनों महापुरुषों का जन्म 25 दिसंबर को हुआ था। देश के सपूतों की ख्याती केवल देश में ही नहीं बल्कि विश्व के पटल पर भी कायम है।

पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न से विभूषित अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर मध्य प्रदेश में हुआ था। मृत्यु 16 अगस्त 2018 को एम्स अस्पताल में हुआ। पूर्व प्रधानमंत्री के 95 वीं जयंती पर देश के कई हिस्सों में कार्यक्रम हो रहा है। वहीं देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत बड़े नेताओं ने वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी। वाजपेयी जी कवि के साथ-साथ एक कुशल वक्ता भी थे। इनकी हर एक कविता दिलों को छू जाती है।
कुछ ऐसी हीं एक कविता थी जिन्होंने एक सभा में आज़ादी के विचार पर बोला था ,

इसे मिटाने की साज़िश करने वालों से कह दो 
कि चिंगारी का खेल बुरा होता है,
औरों के घर आग लगाने का जो सपना 
वो अपने ही घर में सदा खड़ा होता है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वाजपेयी के जन्म दिन पर जल संकट की समस्या को दूर करने के लिए सरकार द्वारा अटल भू जल योजना का शुरुआत किया। इसके अलावा रोहतांग टनल सुरंग को अब अटल टनल के नाम से जाना जाएगा,जो लेह से मनाली को जोड़ने वाला 8.8 किलोमीटर सुरंग का 80 फीसदी काम चुका है। मनाली और केलांग के बीच दूरी करीब 45 किलोमीटर कम हो जाएगी। दिल्ली के विज्ञान भवन में हुए कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र कहा कि आज भारत के दो रत्नों अटल बिहारी वाजपेयी,मदन मोहन मालवीय जन्म दिन है। इसी कार्यक्रम के दौरान पीएम ने पानी बचाने पर जोर दिया कहा कि किसान,युवा,स्टार्टअप करने वाले पानी बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 70 साल में सिर्फ 3 करोड़ घरों में पीने का पानी पहुंचा है वहीं सरकार का यह लक्ष्य हैं कि 2024 तक हर घर तक पानी पहुंचाना।

अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मदन मोहन मालवीय के जन्म दिन को लेकर वाराणसी सहित पूरे भारत में कार्यक्रम हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बड़े नेताओं ने श्रद्धांजलि दी। मालवीय जी का जन्म 25 दिसंबर 1861 को प्रयागराज में हुआ था और मृत्यु 12 नवंबर 1946 को वाराणसी में हुआ। मालवीय एक कुशल राजनीतिज्ञ,दूरदर्शी शिक्षाविद,संवेदनशील समाज सुधारक,समर्पित देश भक्त और धर्मपरायण नेता थे।

इन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में 1916 में नये उभरते भारत की नींव रखी। उन्होंने भारत के गौरव स्तंभ की स्थापना काशी हिन्दू विश्वविद्यालय रूप में की। आठ किलोमीटर की परिधि में बना यह विश्वविद्यालय दुनिया के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालय है। भारत में विज्ञान प्रौघोगिकी शुरुआत यही से हुई। यह पहले व्यक्ति थे जो भारतीय विज्ञान के उज्जवल नक्षत्रों और पश्चिमी की नवीन प्रतिभाओ को एक साथ लाए। महामना इस शिक्षा के केंद्र को स्थापित करते हुए कहा था कि “काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना से विश्व को यह विशेष संदेश जाता है कि हमने सरस्वती के मंदिर में ज्ञान का दीप प्रज्वलित किया है”। धर्मप्राण महामना ये मानते थे की सभी को शिक्षा का एक समान अधिकार मिले चाहे वह लड़का हो या लड़की। कई विद्वानों ने तो उन्हें ‘भिक्षुक – सम्राट ‘की पदवी दी थी। इनका साहस ही था, जो उन्होंने अकेले ही ‘हिन्दू विश्वविद्यालय ‘ इतनी बड़ी संस्थान खोलने का संकल्प कर लिया। इनकी वाणी में इतनी मधुरता थी कि जिनके पास ये चंदा लेने जाते वे बिना किसी सवाल जवाब के ही उनको चन्दा दे देते थे। इनके वाणी की मधुरता पर एक शायर की यह कथन बिल्कुल सच बैठता है-

असर लुभाने का प्यारे ! तेरे बयान में है।
किसी की आँख में जादू,तेरे जबान में है।

इन दोनों विभूतियों का देश के प्रति त्याग और भारत के गौरव को चार चांद लगाने के चलते हीं 2015 को देश के सबसे बड़े रत्न भारत रत्न  सम्मानित किया गया।