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19 सालों से चल रहा झोपड़ी में ये पुलिस चौकी, जिम्मेदार बेखबर

जौनपुर। देश की सुरक्षा का जिम्मा उठाने वाले जवान ही आज सुरक्षित नहीं हैं, चाहे वो सीमा पर हो या फिर अपने ही शहर में ही क्यों ना हों। जी हां आज हम आपको एक ऐसे पुलिस चौकी के बारे में बताने जा रहे हैं जो हाइवे पर सालों से झोपड़ी में ही चल रही है, वहां तैनात पुलिसकर्मी अपनी जान की परवाह ना करते हुए अपनी ड्यूटी को बखूबी निभा रहे हैं। लखनऊ-वाराणसी हाईवे पर स्थित ये पुलिस चौकी प्रशासन की उपेक्षा की शिकार हुआ बैठा है, मगर अब तक किसी आलाधिकारी ने इसकी टोह तक नहीं ली है। 

जौनपुर लखनऊ हाईवे पर स्थित यह धनिया मऊ पुलिस चौकी पिछले 19 वर्षो से इसी तरह चल रही है। कड़ाके की ठण्डी, गर्मी और बारिश के थपेड़े को झेलते हुए इस चौकी पर तैनात दारोगा और पुलिसकर्मी काम करने को मजबूर हैं। हैरानी वाली बात ये है कि इसी रास्ते से सत्ता में बैठे मंत्री नेता और पुलिस के आलाधिकारी गुजरते हैं, लेकिन इस पर अभी तक किसी की नजर नहीं पड़ी।

इस क्षेत्र में कुल 32 गांव हैं। जिसकी आबादी करीब 50 हजार है। जनता की सुरक्षा के लिए यहां पर एक दारोगा दो हेड कास्टेबल 10 पुलिस जवानों का पद है लेकिन चौकी का भवन न होने के कारण अभी यहां पर एक दारोगा और तीन सिपाही ही तैनात किये गए हैं।

वहीं मौजूदा चौकी इंचार्ज का कहना है कि हम लोग इसी तरह से अपना काम करते आ रहें हैं, साथ ही ये हर वक़्त ये डर भी लगा रहता है कि कोई दुर्घटना ना हो जाये। खास बात यह है कि जिस मार्ग पर यह पुलिस चौकी है,उसी मार्ग से नेता, मंत्री और पुलिस के अधिकारी गुजरते हैं,लेकिन किसी की नजरें इनायत इन पुलिस वालों पर अब तक नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं खुले में होने के कारण यहां सरकारी दस्तावेज भी असुरक्षित हैं।

पुलिस चौकी की यह दुर्दशा भले ही मंत्री और अधिकारियों को नहीं दिखाई दे रही हो, लेकिन इसका दर्द स्थानीय जनता को बहुत है। स्थानीय नागरिक सुभाष चन्द्र मिश्र पुलिस चौकी यह दुर्दशा भले ही मंत्री और अधिकारियों को नहीं दिखाई दे रही हो लेकिन इसका दर्द स्थानीय जनता को बहुत है। उनका कहना है कि अगर सरकार चौकी का निर्माण करवाने में असमर्थ है तो सभी स्थानीय मिलकर चौकी का निर्माण करवा देंगे।

जब इस सिलसिले में चौकी इंचार्ज से बात किया गया तो उन्होंने बताया कि आम जनता की समस्या सुनने के लिए रोड के किनारे चौकी बनाई गई है। खतरा तो जरूर है लेकिन आम जनता की समस्या सुनना भी जरूरी है। प्रशासन जमीन खोज रही है,जैसे ही कोई जमीन मिलती है उसपर चौकी बनवा दिया जायेगा।

बहरहाल अब देखना ये है कि प्रशासन की आंख कब खुलती है? कब पुलिसकर्मियों को झोपड़ी से निकलकर व्यवस्थित चौकी में शिफ्ट किया जाता है।

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