अपना प्रदेश

गंगा के तटवर्ती बाढ़ ग्रसित इलाकों के लिए वरदान है यह धान 

गाजीपुर। हर साल गंगा के आगोश में हजारों एकड़ धान की फसल समा जाती है। किसानों की बर्बादी का यह मंजर उत्तर प्रदेश सहित गंगा के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ के समय देखने को मिलता है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने विशेष किस्म के धान के बीज का इजाद किया है। जिसपर 8 से 10 दिनों तक पानी में डूबे रहने के बाद भी इस पर  कोई असर नहीं पड़ेगा और फसल भी अच्छी होगी।

गंगा और बाढ़ के तटवर्ती इलाकों में किसान खेती नहीं करते। क्योंकि 5 से 10 दिनों तक गंगा का पानी खेतों में रहता है,और सारी फसल पानी में सड़कर बर्बाद हो जाती है। इसके लिए कृषि वैज्ञानिकों ने एक ऐसा धान का बीज इजाद किया है जो 5 से 10 दिनों तक पानी में डूबे रह सकता है,और पानी का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यह बाढ़ के पानी में सड़ता भी नहीं। बल्कि पानी के उतरने पर अच्छी पैदावार देता है। यह कोई और धान नहीं बल्कि धान की स्वर्णा सबुआ प्रजाति है।

जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि धान की फसल में ज्यादा दिनों तक पानी जमा रहता है। जिससे उसका तना नीचे से सड़ने लगता है। वहीं स्वर्णा सबुआ प्रजाति के धान के साथ ऐसा नहीं होता। बाढ़ का  पानी धान की फसल से 8 से 10 दिन बाद उतरता है उसके बाद भी स्वर्णा सबुआ में जींस उपस्थित रहते हैं जिसकी वजह से कल्ले फूटते है। जिससे किसान को अच्छी पैदावार मिलती है।

Click to comment

You must be logged in to post a comment Login

Leave a Reply

Most Popular

To Top