वाराणसी

पान के शौकीनों के लिए है ये खबर, ज़रूर पढ़ें PBCR रिसर्च की ये रिपोर्ट

वाराणासीl ‘खइके पान बनारस वाला,खुल जाये बंद अकल का ताला’ ये गाना हर पान पसंद करने वाले के जुबान पर आप को मिल जायेगा। काशी के हर गली में आपको पान के शौकीन दिख जायेंगे।ये खबर हर पान के शौकीन के लिए है। महामना पण्डित मदन मोहन मालवीय कैंसर केंद्र और होमी भाभा कैंसर अस्पताल ने शुक्रवार को जनसंख्या आधारित कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार एक रिपोर्ट जारी किया है, जिसके अनुसार वाराणसी का हर तीसरा व्यक्ति मुंह के कैंसर से पीड़ित है जोकि एक चिंता का विषय है।

बता दें कि कैंसर रजिस्ट्री( PBCR )रिपोर्ट के अनुसार एक तरफ जहां पुरुषों में  मुंह का कैंसर है तो महिलाओं में  स्तन, गर्भाशय-ग्रीवा की कैंसर की समस्या अत्याधिक है। इस समस्या पर वाराणसी के टाटा मेमोरियल सेंटर कैंसर हॉस्पिटल के निदेशक डॉ सत्यजीत प्रधान ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान गहरी चिंता जतायी।

इस दौरान उन्होंने  मीडिया के सामने कैंसर रजिस्ट्री (PBCR ) के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि 2017 में वाराणसी में कैंसर के कुल 1907 मामले  थे।  इनमे 1058 पुरुष, जबकि 849 महिला मरीज़ थीं।  वाराणसी में प्रति एक लाख आबादी पर पुरुषों में इसकी संख्या 59.2 प्रतिशत है, जबकि महिलाओं में यह दर 52.2 प्रतिशत है। वहीं मौत की बात करें तो प्रति एक लाख पर 24.4 पुरुष मरीज़ और 20.8 प्रतिशत महिलाओं की मौत हो रही है।

 वहीं एक रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी क्षेत्र के लोग  मुंह के कैंसर की चपेट में ज़्यादा आये हैं। वहीं महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर शहरी क्षेत्र की तुलना में ग्रामीण इलाकों में दोगुना अधिक दिखा।  इसको लेकर डॉ सत्यजीत प्रधान ने कहा कि इन कैंसर को समय रहते रोका जा सकता है, हालाँकि उसके लिए कई तरह के जागरूकता कार्यक्रम और अभियान की आवश्यकता है।

बता दें की PBCR की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2017 से लेकर सितम्बर 2020 तक 8500 कैंसर के मामले वाराणसी में दर्ज किये जा चुके हैं, जबकि तीन हज़ार से अधिक लोगों की कैंसर की वजह से मौत हुई है। इस विषय पर डॉ. प्रधान ने कहा है कि ज्यादा से ज्यादा जागरूकता अभियान चलाकर लोगों में जागरूकता फैलाकर ही इस पर काफी हद तक इसको रोका जा सकता है।

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