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अनोखी है उमा-महेश्वर की ये काली प्रतिमा, गुप्तकाशी में करते हैं ये वास

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सोनभद्र। यूं तो पूरी काशी ही शिव नगरी है लेकिन कुछ शिव मंदिर का खासा महत्व है। उन्हीं में से काशी से 39 किलोमीटर दूर सोनभद्र में स्थित है गुप्तकाशी के नाम से विख्यात शिवद्वार। महाशिवरात्रि पर्व पर हर साल सुप्रसिद्ध शिवालयों में भक्तों का हुजूम दर्शन-पूजन करने के उमड़ पड़ता है। वहीं सोनभद्र के इस शिवद्वार में भी भक्तों के रेला को देखा जा सकता है। 

बता दें कि शिवद्वार में उमा-महेश्वर की मूर्ति एक विशाल मंदिर में स्थापित है। 11वीं सदी की यह मूर्ति काले पत्थर से निर्मित है। यह 3 फुट ऊंची मूर्ति सृजन मुद्रा में स्थापित है। शिवद्वारमंदिर रॉबर्ट्सगंज से 40 किलोमीटर शिवद्वार रोड पर घोरावल से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ये विशाल मंदिर भगवान शिव और पार्वती को समर्पित है। इस मंदिर के गर्भ गृह में देवी पार्वती की 11 वीं सदी के काले पत्थर की मूर्ति रखी हुई है। धार्मिक महत्व के कारण इसे दूसरी काशी यानि की गुप्तकाशी की मान्यता दिया गया है। मंदिर में अन्य देवी-देवताओं की काले पत्थर की मूर्तियां भी रखी हुई है।

हर साल शिवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए यहां आते हैं। उमा महेश्वर की मूर्ति की मान्यता के बारे में लोग बताते हैं कि एक किसान को उन्हीं के खेत में हल चलाते समय गांव में उमा महेश्वर की प्रतिमा मूर्ति मिली थी। जब वे खेत में हल चला रहे थे तभी अचानक हल नीचे जमीन में किसी पत्थर से फस कर रुक गया और वहां से अचानक दूध की धारा फूट पड़ी। ग्रामीणों ने जब मिट्टी हटाई तो वहां काले पत्थरों की भगवान शिव पार्वती की प्रतिमा निकली। उस प्रतिमा को लोगों ने वहीं स्थापित कर पूजा शुरू कर दी।

शिवद्वार के बाबू जगतबहादुर सिंह की धर्मपत्नी बहुरिया अविनाश कुंवरि ने शिवद्वार मंदिर का निर्माण सन 1942 में अपने स्व. पति की पुण्यस्मृति में कराया था। चुनार के कारीगरों द्वारा चुनार के पत्थर से तीन वर्षो में मंदिर का निर्माण हुआ। सन 1985 में परमहंस आश्रम अमेठी के श्री हरिचैतन्य ब्रह्मचारी की प्रेरणा से बद्रिकाश्रम के शंकराचार्य जगद्गुरू स्वामी विष्णु देवानन्दजी सरस्वती महाराज के कर कमलों से मंदिर में श्रीशिवलिंग की वैदिक रीति से स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। मंदिर के मुख्य पुजारी सुरेश गिरि ने बताया कि भगवान शिवशंकर भक्तों की मुरादें पूरी कर देते हैं।

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