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सरकारी मंसूबों पर पानी फेरते दबंग कोटेदार, दाने-दाने को मोहताज होते गरीब

चंदौली। कोरोना के इस काल में गरीबों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। गरीब दाने-दाने को मोहताज हो चुके हैं। सरकार ने गरीबों के लिए सरकारी राशन की दुकानों पर जरुरी सामान को मुहैया कराना शुरु कर दिया है। लेकिन गरीबों का खून तो इंसान के रुप में घुम रहे भेड़िये को पसंद होता ही है, हर भेड़िया ऐसे खून को चूसने की फिराक में होता है। चंदौली में गरीबों के खून चूसने वाले ऐसे जोंक हैं, जो अड़ीयल किस्म के हैं। एक तो चोरी उपर से सीना जोरी। मामला विकास खंड सकलडीहा के रेवसा गांव का है।

सरकार भले ही प्रवासी मजदूरों व ग्रामीणों को इस कोरोना महामारी में फ्री राशन, किराशन, चना वितरित करने का फैसला किया है। लेकिन हकीकत तो इसके परे है। या यूं कहें कि सरकार के मंसा के विपरीत काम किया जा रहा है। सरकारी गल्ले की दुकान पर खून चूसने वाले जोंक बैठे हैं, जिन्हे गरीबों के खून में रसमलाई का मजा आ रहा है। कोटेदार साहब का कहना है कि वो तेल नहीं बेच रहे हैं। जबकि ग्रामीणों का कहना है कि साहब 45 रुपये लीटर किरासन का तेल बेच रहे हैं। हालांकि इसका रेट महज 15 रुपये ही है। यानी कोटेदार साहब तेल नहीं बेचते, बल्की गरीबों का तेल निकाल देते हैं।

इसकी शिकायत को लेकर ग्रामीणों ने डीएम कार्यालय का घेराव किया। कार्ड धारकों का आरोप है कि गांव के कोटेदार रमेश पांडेय द्वारा 15 रुपये प्रति लीटर मिलने वाला किरासन 45 रुपये प्रति लीटर दिया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि केवल किरासन ही नहीं बल्की दाल, चावल और चना को भी सरकारी रेट से ज्यादा लेकर बेचा जा रहा है। इसका विरोध करने पर गाली देकर भगा दिया जा रहा है। गरीब आदमा जाए तो जाए कहां।

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