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मुफलिसी में भी नहीं टूटने दिया हौसला, काशी का बढ़ा रहा मान

वाराणसी। प्रतिभा और हुनर किसी बंदिशों के मोहताज नहीं होते। व्यक्ति विषम परिस्थितियों में भी अपने प्रतिभा के दम पर मंजिल को पा सकता है, ऐसा ही कुछ वाराणसी के लाल गोविंद यादव ने कर  दिखाया है। न सिर्फ उसने अपने प्रयासों से काशी का मान बढ़ाया है,बल्कि मुफ़लिसी के दौर से गुजर रहे अपने परिवार के माली हालत को भी सुधारने का प्रयास किया है।

शहर से कुछ किलोमीटर दूर बेलवरियां के नकच्छेद गांव निवासी पेशे से राजगीर राम किशुन यादव के तीन बेटों में से एक गोविंद वर्तमान में इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहा है। घर की माली हालत तंग होने के बाद भी कुछ कर दिखाने का जज्बा गोविंद में काफी समय से था। इसमें उसके दोस्तों ने उसे मार्ग दिखाया और गोविंद की रुचि 2009 से खो-खो खेलने में हुई। इसी खेल को गोविंद ने अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। इंटरमीडियट की पढ़ाई कर रहे 17 वर्षीय गोविंद बताते हैं कि स्कूल से आने के बाद दोस्तों के साथ वह खेलने चला जाता था। दोस्तों को खो खो खेलता देख उसके मन में भी खो खो के प्रति रुची बढ़ी और दोस्तों से प्रेरित होकर 2009 से खो खो खेलना शुरु कर दिया।

नक्छेदपुर निवासी गोविंद के पिता रामकिशुन यादव राजगीर का काम करते है, जिससे दो जून की रोटी का जुगाड़ हो जाता है। गोविंद की मां श्यामदुलारी अपने पति के इस काम में उनका हाथ बटाती है। उनकी सोच है कि बेटा किसी प्रकार से अपने लक्ष्य को पा ले,जिससे उनके दिन शायद बहुर जाएं। गोविन्द चाय की दुकान चलाकर परिवार को आर्थिक मदद भी देता  है।  वाराणसी के सिगरा स्टेडियम में गोविन्द को खो खो के गुर सिखाने वाले कोच अनिरूद्ध सिंह भी गोविन्द के प्रयासों की सराहना करते दिखाई देते हैं। उनका मानना है कि अबर सरकार गोविन्द को सपोर्ट करें तो यह आगे चलकर विश्व स्तीय खिलाड़ी के रूप में देश का मान बढ़ा सकता है।

इतना ही नहीं गोविन्द के इस कड़ी महेनत व अर्जित की गई उपलब्धियों से गांव के लोगों में भी काफी हर्ष व्याप्त है। गांव के प्रधान राजेंद्र चौहान कहते हैं कि गोविंद गांव का नाम रौशन कर रहा है। इसमें जो भी मदद उनकी तरफ से हो सकती है वो मदद सरकार से दिलवाने की कोशिश करेंगे। अब ऐसे में एक छोटे से गांव के गरीब परिवार से निकल कर प्रदेश में अपनी पहचान वाले गोविन्द का सपना है कि उसे देश में ही नहीं बल्कि विदेशों तक लोग जाने,जिसमें उसे सरकार से मदद की अपेक्षा है। देखना अब यह होगा कि उसका यह सपना कब पूरा होता है?

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