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मिट्टी के दीए को है ग्राहकों की दरकार, भगवान भरोसे बैठे हैं कुम्हार

रिपोर्ट: मो. आसिफ

वाराणसी। कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा काफी प्रयास किये जा रहे हैं,लेकिन धरातल पर ग्रामीण कुटीर उद्योग हासिए पर है। चाइना के प्रोडक्ट का विरोध तो काफी समय से हो रहा है, बावजूद इसके चाइना के प्रोडक्ट मार्केट में धड़ल्ले से बिक रहे हैं। दीपावली पर जब घरों में रोशनी होती है, तो ​वहां कुम्हारों के दीए से कहीं अधिक चाइना के झालर देखने को मिलते हैं। यही कारण है कि कुम्हार अब भगवान भरोसे अपना जीवनयापन चला रहे हैं, क्योंकि चाइनीज झालर मिट्टी के दीए पर भारी पड़ रहे हैं।

ग्रामीण कुटीर उद्योग से जुड़े कुम्हारों की हालत इन दिनों काफी दयनीय है। कुम्हारों का कहना है कि पोखरे और तालाबों को पाट कर मल्टीस्टोर बिल्डिंग व मकान बना दिये गये है। इसके कारण अब कुम्हारों को मिट्टी का जुगाड़ करने के लिए काफी जद्दोजहद करना पड़ रहा है। अगर किसी प्रकार कुम्हार इसका जुगाड़ कर भी लें, तो दूसरी तरफ बाजार में दीए की डिमांड काफी कम हो रही है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण चाइनीज झालर हैं।

चाइनीज झालरों का बढ़ रहा प्रभाव
पांडेयपुर स्थित नई बस्ती में रहने वाले कुम्हार प्रकाश प्रजापति बताते हैं कि चाइनीज झालरों के आगे हम लोगों के बनाये हुए दीए अब बाजार में नहीं बिक पाते हैं। चाइनीज झालर को लोग एक बार खरीदते हैं और कई साल तक इसका प्रयोग करते हैं। वहीं दीए को हर साल खरीदना पड़ता है। जबकि चाइनीज झालरों की अपेक्षा दीए सस्ते होते हैं। बावजूद इसके लोग इसका प्रयोग पहले की अपेक्षा कम कर दिए हैं। इसके कारण कुम्हरों के जीविकोपार्जन पर काफी बुरा प्रभाव पड़ रहा है,क्योंकि कुम्हारों का एक मात्र सहारा मिट्टी के सामान ही हैं, जिसमें दीपावली जैसे त्योहार पर बिकने वाले दीए भी हैं।

कुम्हारों के बच्चे कर रहें पलायन
कुम्हार लल्लन प्रजापति कहते हैं कि दीए को लेकर बाजार में घूमते हैं, लेकिन उसे बेच पाना अब पहले जैसा नहीं है। क्योंकि अब इनकी डिमांड न के बराबर हो गई है। चाइनीज झालर पूरी तरह से बाजार पर हावी हो गये हैं,जिससे अब रोजी रोटी पर भी संकट मंडराने लगा है। यही कारण है कि हमारे बच्चे अब इस काम को छोड़ कर दूसरी ओर पलायन कर रहे हैं। अब कोई इस काम को नहीं करना चाह रहा है।

अब ऐसे में सरकार को यह सोचना होगा कि इन कुम्हारों की आजीविका सुचारू ढंग से कैसे चल सकेगी। इन हालातों पर अगर जल्द ध्यान न दिया गया,तो स्थिति आने वाले समय में और भयावह हो जायेगी।

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