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महाशिवरात्रि पर काशी में उमड़ेगा भक्तों का रेला, प्रशासन ने सुरक्षा की चाक-चौबंद

वाराणसी। काशी नगरी भगवान के त्रिशूल पर बसी है। महादेव की नगरी काशी में महाशिवरात्रि का पर्व कल बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा। श्रद्धालुओं का तांता एक दिन पहले से नगर में लगना शुरू हो जाता है। बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक,दर्शन के लिए आज रात से ही भक्तों का रेला लगेगा। कल सुबह आस्था का हुजूम मंदिर के आसपास व शहर की सड़कों पर दिखेगा। जिला व पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के तमाम इंतजाम किए हैं।

बता दें कि महाशिवरात्रि को लेकर हुई बैठक के बाद शहर को पांच जोन और 10 सेक्टरों में बांटकर 70 मजिस्ट्रेटों के अलावा लगभग साढ़े तीन हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इस दौरान चार सहायक पुलिस अधीक्षक क्षेत्राधिकारी चार कंपनी पीएसी के अलावा रैपिड एक्शन फोर्स  संग गंगा घाटों पर एनडीआरएफ को तैनात किया गया है।

इस महापर्व के मद्द्देनजर चौबेपुर कैथी स्थित मारकंडेय महादेव धाम, सारनाथ स्थित सारंग नाथ महादेव, काशी के दक्षिण द्वार पर स्थित शूटलंकेश्वर महादेव, दारानगर स्थित महामृत्युंजय महादेव, के अलावा गौरी केदारेश्वर महादेव, रामेश्वर महादेव, समेत तमाम प्रमुख मंदिरों में भी कल भक्तों का सैलाब उमड़ेगा। यहां स्थित मंदिरों में हरियाली श्रृंगार, साज, सज्जा के साथ तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। कैथी मार्कण्डेय महादेव में दो दिवसी मेला चलता है। इस मेले में लोगों की भारी भीड़ होती है इसे देखते हुए यहां भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

शहर के सैकड़ों अन्य शिवालयों में भी सुबह से साफ सफाई के साथ रंग रोगन कर मंदिरों को सजा दिया गया है। काशी में कंकड़ शंकर का आभास कल सहज ही महसूस किया जा सकता है।एडीजी बृजभूषण, आईजी विजय सिंह मीणा संग जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा, एसएसपी प्रभाकर चौधरी और एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने कल  महाशिवरात्रि पर्व पर बड़ी संख्या में दर्शनार्थियों के आने तथा शुक्रवार के दिन जुमा की नमाज एक ही दिन पड़ने पर कानून व्यवस्था और सुगम यातायात व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर व आसपास के मार्गों पर भ्रमण किया।

वहीं काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शनार्थियों को बाबा का सुगमता से दर्शन कराने हेतु मार्ग पर की गई बैरिकेडिंग,मन्दिर में प्रवेश करने तथा दर्शन करने के बाद निकासी का मार्ग आदि व्यवस्था पर स्थलीय भ्रमण कर मुहर लगाई। विशेष रुप से पुलिस, खुफिया और यातायात विभागों को चौकन्ना रहने के निर्देश दिए गए। काशी खंड के 42वें शिवलिंग, कृतिवशेस्वर महादेव मंदिर का भी निरीक्षण किया गया तथा पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था कराने का निर्देश दिया गया। मंदिर के आने जाने वाले रास्ते तथा आसपास विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया।

क्या है इसका महात्म 
पुराणों के अनुसार बाबा भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए महा शिवरात्रि को साविधि व्रत पूजन, जलाभिषेक, रात्रि जागरण से असीम फल की प्राप्ति होती है। इस बार श्रवण नक्षत्र के संयोग से शिवरात्रि का विशेष महत्व है। फाल्गुन चतुर्दशी तिथि 20 की शाम 5 बजकर 13 मिनट पर शुरू होकर 21 की रात तक रहेगी। पौराणिक मान्यता है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को ही देवाधिदेव महादेव का माता पार्वती के साथ विवाह हुआ था। इसीलिए स्थिति को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।  ईशान संहिता के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात ज्योतिर्लिंग का प्रादुर्भाव भी हुआ। प्राचीन काल से वैदिक मान्यता है कि महाशिवरात्रि व्रत करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इस व्रत को धारण करने से उसे धर्म ,अर्थ ,काम व मोक्ष स्वयं ही प्राप्त हो जाता है।

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