VARANASI: तुलसीघाट पर कान्हा करेंगे नागनथैया, कालियानाग के फन पर बजाएंगे बांसुरी

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वाराणसी। काशी अपनी प्राचीनता और धार्मिक परम्पराओं से जाना जाता है और सदियों पुरानी परम्पराएं यहां आज भी उतने ही उल्लास और उत्साह के साथ मनाई जाती हैं। करीब 450 वर्षों पुरानी एक ऐसी ही परंपरा में आज आस्था का अद्भुत संगम गंगा किनारे देखने को आज के दिन मिलता है। वो है लक्खा मेला में शुमार  तुलसीघाट पर भगवान श्रीकृष्ण की नागनथैया लीला का जिवंत दृश्य जो लोगों को मंत्रमुग्ध कर देता है। कुछ पलों के लिए गंगा मानो यमुना बन जाती हैं और काशी मुथरा में बदल जाती है। नाग नथैया लीला में भगवान कृष्ण के बाल स्वरुप द्वारा गंगा की लहरों के बीच कालिया नाग का मर्दन किया जाता है,जिसे देख हर ओर हर हर महादेव के उद्घोष से आकाश गुंजायमान हो उठता है। 

 बता दें कि कार्तिक शुक्ल चतुर्थी तद्नुसार गुरुवार की शाम तुलसीघाट पर भगवान श्रीकृष्ण की नागनथैया लीला सजेगी। लीला में ठीक शाम 4.40 बजे भगवान कृष्ण कदंब की डाल से कूदेंगे और कालियनाग को नाथ कर उसके फन पर नृत्य मुद्रा में बांसुरी बजाते हुए दर्शन देंगे। अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास की ओर से आयोजित इस लीला की ख्याति बनारस के लक्खा मेला के रूप में प्रसिद्ध है।कदंब की डाल से गेंद निकालने भगवान श्रीकृष्ण यमुना बनी गंगा में छलांग लगाएंगे। नदी में कालिया नाग को नथने के बाद बंसी बजाते हुए प्रभु श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। कृष्ण की इस लीला के दर्शन कर भक्त भी निहाल हो उठेंगे।

काशी में प्रतिवर्ष गोस्वामी तुलसीदास द्वारा स्थापित माने जाने वाली लीला को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। देर रात तक चलने वाले लक्खा मेले की 493 सालों की परंपरा को निभाने के लिए काशी वासियों का उत्साह देखते ही बनता है। वहीं काशी नरेश भी आयोजन में शामिल होंगे और आयोजकों को स्‍वर्ण मुद्रा प्रदान करने की परंपरा का भी निर्वाह करेंगे। घाटों की अनगिन श्रृंखला के बीच तुलसीघाट पर आस्‍था का जहां रेला उमडेगा वहीं दूर देश से सैलानी भी काशी की इस अनाेखी लीला का नजारा लेने घाट पर मौजूद रहेंगे।