वाराणसी। हमारे देश को आजाद हुए 74 साल हो गए हैं। 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों की गुलामी से हम सभी पूरी तरह से आजाद हो गए थे।  इस आजादी के लिए कई लोग जहां सूली पर चढ़ गए तो कइयों ने अपने सीने पर गोली खाकर अपने प्राण इस देश के लिए न्यौछावर कर दिया। अभी दो रोज पहले ही 74 वां स्वतंत्रता दिवस हम सभी ने मनाया है। इसी को लेकर हमारे रिपोर्टर नोमेश कुलदीप ने लोगों से स्वतंत्रता दिवस के बारे में बात कर जानने की कोशिश कि लोगबाग इसके बारे में कितना कुछ जानते हैं, देखिये ये खास रिपोर्ट।

दो दिन पहले ही हमारे देश और देशवासियों ने 74 वां स्वतंत्रता दिवस मनाया है। इसी को लेकर जब हमने शिक्षकों से पूछा तो किसी ने स्वतंत्रता दिवस को इंडिपेंडेस डे बताकर बात ही ख़त्म कर दिया तो किसी ने गणतंत्र दिवस ही बोल दिया। इतना ही नहीं जब हमारे रिपोर्टर ने एक स्टूडेंट से पूछा कि देश कब आजाद हुआ था तो उसने जो जवाब दिया वो सुनकर बहुत हैरानी हुई। उसने अपने जवाब में देश की आजादी का साल 1945 बताया। ये तो एक छात्र है, ऐसे तमाम बच्चे और बड़े क्लास के छात्र मिल जायेंगे जिनको ये तक नहीं मालूम की हमारा देश कब आजाद हुआ था। कहीं ना कहीं ये चीजे हम सबको सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या इतनी ज्यादा फीस देकर नामी गिरामी स्कूलों में अपने बच्चों को पेरेंट्स  इसलिए भेजते हैं कि उनके बच्चों का उज्ज्वल भविष्य बन सके। लेकिन हकीकत में उन्हें सही मायने में कितना नॉलेजमिल रहा है ये आप बच्चे के दिए जवाब से ही पता चल रहा है।

वहीं जब इस बारे में सरकारी स्कूलों में कार्यरत उन टीचरों से हमारे रिपोर्टर ने बात की तो कुछ शिक्षकों ने सही जवाब दिया तो कुछ के जवाब हंसी के पात्र बनाकर रह गए।कुछ को तो इतना तक नहीं मालूम कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस में क्या अंतर् है। और तो और कइयों को ये तक नहीं मालूम कि दिल्ली के लाल किले पर गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर कौन झंडा फहराता है। हद तो तब हो गई साहब जब उनसे अपने जिले के जिलाधिकारी का नाम पूछा गया और उन्हें ये तक नहीं पता था।

आप सभी को एकबारगी इस न्यूज़ को देखकर उसमें दिए लोगों के जवाब को सुनकर हंसी तो जरूर ही आई होगी लेकिन यहाँ हंसने की नहीं बल्कि सोचने वाली बात है कि हमने आने वाले अपने नौनिहालों का भविष्य किसके हाथों में सौंप दिया है। ऐसे लोग क्या किसी का भविष्य बनाने में अपनी सहभागिता दर्ज करा सकते हैं या उनके भविष्य से खिलवाड़ कर देश के भविष्य को भी कहीं ना कहीं बिगाड़ने का बस काम कर रहे हैं। अगर शिक्षकों का यही हाल रहा तो देश का भविष्य क्या होगा ये आप खुद ही तय कर लीजिये।

Special Report: हाले शिक्षक गैर है दोस्तों, नौनिहालों का मुस्तकबिल क्या होगा ?
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