BIRTHDAY SPECIAL: जानें ‘कोकिला’ से जुड़ी दिलचस्प बातें

0
74

ब्यूरो डेस्क। ‘मेरे जीवन की क्षुधा, नहीं मिटेगी जब तक, मत आना हे मृत्यु, कभी तुम मुझ तक’  ये कहना था  भारत कोकिला सरोजनी नायडू का। बता दें कि सरोजनी नायडू कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनी थी। ये एक कवियत्री होने के साथ ही एक अच्छी वक्ता भी थी। 1925 में सरोजनी नायडू को कांग्रेस की अध्यक्षता सौंपी गयी थी। 1932 में वह भारत की प्रतिनिधि के रूप में दक्षिण अफ्रीका गयी थी।

इनका जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में बंगाली परिवार में हुआ था। इनके पिता अघोरनाथ चट्टोपाध्याय शिक्षाशास्त्री और वैज्ञानिक थे। जिन्होंने हैदराबाद के निजाम कॉलेज की स्थापना की थी। वहीं इनकी माता वरदा सुंदरी बंगाली भाषा में कविताएं लिखा करती थीं। सरोजनी अपने आठ भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं। इनके एक भाई क्रांतिकारी थे, जिनको 1937 में एक अंग्रेज ने मार दिया था।

सरोजनी नायडू उर्दू, इंग्लिश, तेलगू फारसी और बांग्ला भाषा की अच्छी जानकार थी। मैट्रिक की परीक्षा इन्होंने केवल 12 साल की उम्र में पास कर लिया था। सरोजनी को बचपन से ही कविता लेखन का शौक था। उन्होंने कविता लेखनी में रूचि लेना अपनी मां को देखकर सीखा था, जो खुद एक लेखिका थी। इन्होंने कम उम्र में ही कविता लिखी थी,जिसे प्रभावित होकर हैदराबाद के निजाम ने इनको विदेश में पढ़ने के लिए स्कालरशिप दिया था। सरोजनी नायडू 16 साल की उम्र में इंग्लैंड के किंग्स कॉलेज लंदन में पढ़ने गयी थी। अपने आगे की शिक्षा इन्होंने कैम्ब्रिज के ग्रिटन कॉलेज से की।

सोलह साल की उम्र में सरोजनी नायडू ने गोविंदराजुलू नायडू के साथ विवाह किया था।  इनके चार बच्चें भी हुए रणधीर, लीलामणि, पदमज, जयसूर्या। जब महिलाएं अपने घरों से बाहर नहीं निकला करती थी उस दौर में इन्होंने महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने का काम किया था।

गोल्डन थ्रैशोल्ड, बर्ड ऑफ टाइम और ब्रोकन विंग कविता संग्रह ने इन्हें सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं। भारत की स्वतंत्रता के बाद वह पहली महिला गवर्नर (उत्तरप्रदेश) भी बनी थी। लखनऊ में 2 मार्च 1949 को दिल का दौरा पड़ने से इनकी मृत्यु हो गयी थी।