सात दशकों बाद भी इस गांव में नहीं खुल सका स्कूल, जिम्मेदार बेखबर 

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चन्दौली। केंद्र व यूपी सरकार शिक्षा को लेकर तमाम योजना चला रही हैं, जिससे बच्चे पढ़ लिख कर शिक्षित बने, लेकिन अभी भी मंजिल दूर ही दिखाई दे रही है। आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां अब तक बच्चों के लिए स्कूल का निर्माण नहीं हो पाया है। बच्चों को दूसरे गांव में रोजाना पांच से छह किमी चलकर पढ़ने के लिए जाना पड़ता है। ताजा मामला चंदौली के चकिया क्षेत्र के प्रितपुर गांव का है।  

चंदौली के चकिया क्षेत्र स्थित प्रितपुर गांव में अब तक कोई स्कूल नहीं बन पाया है। बच्चों को पढ़ने के लिए रोजाना लगभग छः किलो मीटर का सफर तय करना होता है। दरअसल पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहा संसाधनों की कमी है। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र से लगभग 40किमी की दूरी पर ही ये गांव हैं, मगर अब तक योगी सरकार की नजर इस गांव पर नहीं पड़ी है।

वहीं ग्रामीणों का कहना है कि हमलोगों ने स्कूल निर्माण के लिये तीन बिस्सा जमीन भी रजिस्ट्री करवाकर शिक्षा विभाग को चिट्ठी लिखकर बता दिए हैं, मगर अब तक किसी ने भी इस बात पर खोज खबर नहीं ली। कई बार ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों से सम्पर्क कर गांव में स्कूल बनवाने की गुहार भी लगा चूंके हैं, पर शिक्षा विभाग गांव की समस्या को हल करने की स्थान पर बजट न होने का हवाला देते हुये अपने हाथ खड़े कर दिए हैं । गांव वालों की माने तो अधिकारी भविष्य में स्कूल का निर्माण करा दिये जाने का आश्वासन दिया है।

अब देखना ये है कि प्रशासन की आंख कब खुलती है और इस गांव के बच्चों को स्कूल मुहैया होता है। जब तक स्कूल नहीं बन जाता तब तक इन बच्चों को ऐसे ही पढ़ाई के लिए कठिनाइयों के झंझावत को झेलकर आगे बढ़ना होगा।