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रंगभरी एकादशी कल, कई सालों पर बन रहा विशेष संयोग, करें ये काम

ब्यूरो रिपोर्ट। सनातन धर्म में व्रत त्यौहार की परंपरा काफी पुरानी है फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रंगभरी एकादशी मनाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि आमलकी एकादशी के व्रत से द्वादश मास के समस्त एकादशी के व्रत का पुण्य फल मिलता है, साथ ही जीवन के समस्त पापों का नाश भी होता है। एकादशी के व्रत से सहस्र गोदान के समान है शुभ फल की प्राप्ति बताई गई है। इस दिन स्नान दान व व्रत से भगवान श्री हरि यानी श्री विष्णु जी की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 5 मार्च गुरुवार को दिन में 1:19 पर लगेगी जो कि 6 मार्च शुक्रवार को दिन में 11:45 तक रहेगी 5 मार्च गुरुवार को एकादशी तिथि पढ़ने से आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। 

आज के दिन काशी काशी विश्वनाथ जी का प्रतिष्ठा महोत्सव दिवस भी मनाया जाता है। रंगभरी एकादशी के दिन काशी में बाबा विश्वनाथ का विशेष श्रृंगार होता है और उनको दूल्हे के रूप में सजाते हैं। इसके बाद बाबा विश्वनाथ जी के साथ माता गौरा का गौना कराया जाता है। रंगभरी एकादशी के दिन ही भगवान शिव माता गौरा को विवाह के बाद पहली बार काशी लाए थे। इस उपलक्ष्य में भोलेनाथ के गणों ने रंग-गुलाल उड़ाते हुए खुशियां मनाई थी। तब से हर वर्ष रंगभरी एकादशी को काशी में बाबा विश्वनाथ रंग-गुलाल से होली खेलते हैं और माता गौरा का गौना कराया जाता है।

इस दिन भगवान श्रीहरि की पूजा करने का विधान है। इसके लिए व्रती को अपने दैनिक क्रियाकलाप  से निवृत्त होकर आमलकी रंगभरी एकादशी व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प के साथ व्रत करके समस्त नियम संयम आदि का पालन करना चाहिए। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि आंवले के वृक्ष के नीचे श्री हरि विष्णु का वास माना गया है। धार्मिक परंपरा के अनुसार आंवले के वृक्ष का पूजन पुरवा विमुख होकर करना चाहिए। साथ ही आंवले के वृक्ष के पूजन में पुष्प धूप दीप नैवेद्य अर्पित करने चाहिए पूजन के पश्चात की आरती करके परिक्रमा करना पुण्य फलदाई माना गया है।

आंवले के फल का दान करना भी सौभाग्य में वृद्धि करता है। ओम नमो भगवते वासुदेवाय का अधिक से अधिक संख्या में जप करना चाहिए। रात्रि जागरण करना लाभकारी रहता है। संपूर्ण दिन निराहार रहकर व्रत संपादित करना चाहिए।अन्न ग्रहण करने का निषेध है विशेष परिस्थितियों में दूध या फलाहार ग्रहण किया जा सकता है। व्रत करता को जीवन में शुचिता बरतनी चाहिए साथ ही व्रत के व्रत के दिन में करना चाहिए। अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों को उपयोगी वस्तुओं का दान करना चाहिए, साथ ही गरीबों असहयोग की सेवा एवं परोपकार के कार्य अवश्य करना चाहिए, जिससे जीवन जीवन में सुख समृद्धि खुशहाली बनी रहे।

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