अपना प्रदेश

पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ जब वन चले श्रीराम तो आंखें हो गईं नम

वाराणसी। भगवान राम व माता जानकी के साथ भाई लक्ष्मण जब वनगमन के लिए प्रस्थान किये,तो सभी की आंखें नम हो गईं और लोग भावविभोर हो उठे। दरअसल श्रीआदि लाट भैरव रामलीला समिति वरुणा संगम काशी के तत्वाधान में प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी रामलीला का आयोजन किया गया है।

हनुमान फाटक निवासी शम्भूनाथ पांडेय के आवास पर राम लक्ष्मण सीता की विधिविधान से पूजा अर्चना कर आरती उतारी गयी, जिसके बाद लीला का मंचन हुआ। इस दौरान रामलीला समिति के व्यास दयाशंकर त्रिपाठी के नेतृत्व में वनगमन की शोभायात्रा निकाली गयी। जो विभिन्न रास्तों से होकर पीलीकोठी स्थित धनेसरा तालाब पर पहुंची, जहां पूरे रितिरिवाज के साथ भगवान को भोग लगाया गया। इसके बाद राम, लक्ष्मण व सीता वनगमन के अगले पड़ाव के लिए निकले।

इस संबंध में आदि रामलीला समिति लाट भैरव व्यास दयाशंकर त्रिपाठी ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास के समकालीन भगत द्वारा 1543 में यह रामलीला शुरू की गयी थी। इसकी दो प्रसिद्ध लीला राम गंधैल, जिसमें चित्रकूट जाते समय केवट प्रभु श्रीराम के पैर धुलाता है और दूसरे दिन भरत गंधैल आयोजित की जाती है। इसमें भाई भरत प्रभु श्रीराम के पीछे जाते हैं और केवट भगवान को नदी पार कराता है, खास होता है।

शम्भूनाथ पांडेय के आवास पर भगवान राम लक्ष्मण व सीता के दर्शन पाने के लिए क्षेत्रीय लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। आपको बता दें की ये वही समिति के पात्र है जो पिछले वर्ष धनेसरा तालाब पर लीला करने के दौरान बिमार हो गये थे। दरअसल धनेसरा तालाब पर अधिक मात्रा में अतिक्रमण किया गया था। जिससे क्षेत्र की गंदगियों को तालाब में ही बहा दिया जाता रहा। इसी कारण तालाब में गंदगियों से खतरनाक मच्छर पैदा हो गये थे और ​लीला के पात्र उनकी चपेट में आने से बिमार हो गये थे।

Click to comment

You must be logged in to post a comment Login

Leave a Reply

Most Popular

To Top