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राम मंदिर ट्रस्ट पर मचा बवाल, अदालत का रुख करेगा रामालय न्यास

वाराणसी। लोकसभा में बुधवार को पीएम मोदी ने संसद में राम मंदिर ट्रस्ट के गठन का एलान कर दिया, जिसके बाद से देश भर में इसको लेकर विवाद के बादल उठते नजर आने लगे हैं। इसी कड़ी में काशी में भी संतों में रोष देखने को मिला,जहां स्‍वामी अविमुक्‍तेश्‍वरानंद सरस्‍वती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विगत 9 नवंबर 2019 को देश की सबसे बड़ी अदालत ने रामजन्मभूमि विषयक विवाद में फैसला दिया तो हर सनातनी हिन्दुओं ने अपने हर विचार को एक तरफ रख उसका स्वागत किया था, मगर केंद्र सरकार ने ट्रस्‍ट में भेदभाव किया है, जिसको लेकर रामालय ट्रस्‍ट अब अदालत का रुख करेगा।

उन्होंने आगे कहा कि तीन महीने की लम्बी प्रतीक्षा में हर सनातनी हिन्दू यह कल्पना करता रहा कि श्रीरामजन्मभूमि में रामजी के मन्दिर के निर्माण के बहाने ही सही हमारे शीर्ष धर्माचार्यों को एक साथ मिलजुलकर काम करने का अवसर मिलेगा लेकिन पांच फरवरी को आई अधिसूचना में सरकार ने एक अलग ही न्यास और उसमें अपने कार्यकर्ता सदस्यों की घोषणा कर यह जता दिया कि केन्द्र की भाजपा सरकार को हिन्दू धर्म के सर्वोच्च धर्माचार्यों पर जरा भी भरोसा नहीं है।

केन्द्र सरकार ने श्रीरामजन्मभूमि में मन्दिर निर्माण हेतु न्यास स्थापित कर न केवल शीर्ष धर्माचार्यों को अपमानित किया है अपितु अयोध्या में विराजने वाले अनेक सन्त महन्तों का भी अपमान किया है जिन्होंने इस कार्य में अपना जीवन अर्पित कर दिया। उन्हीं लोगों को अलग कर दिया गया है जो अमान्य है। इसी के तहत अब रामालय ट्रस्ट अदालत की तरफ अपना रख करेगा।

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