वाराणसी

आज से शुरू हो रहा पितृपक्ष, श्राद्ध में करें इन चीजों का दान, मिलेगा मनचाहा लाभ

ब्यूरो रिपोर्ट। प्रतिवर्ष आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक महात्मय यानी पितृ पक्ष के श्राद्ध निर्धारित रहते हैं। प्रौष्ठपदी पूर्णिमा से ही श्राद्ध आरंभ हो जाते हैं। ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि इस वर्ष ये 1 सितम्बर से 17 सितम्बर तक रहेंगे। श्राद्ध शब्द का अर्थ ही है जो कर्म श्रद्धा से किया जाए। हमारे धर्मशास्त्रों में प्रसंग मिलता है कि जो अपने पितरों को प्रसन्न रखने तथा शांति  के  लिए कर्म नहीं करता, वह नाना प्रकार के कष्टों, रोग, शोक, संतान, कष्ट, राजकष्ट एवं भूमि कष्ट से पीड़ित होता है।

पितृ पक्ष में श्राद्ध, पिंडदान, तर्पण करने से पितरों को प्रसन्न किया जा सकता है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष में दान करने से पितरों की आत्मा को संतुष्टि मिलती है और पितृदोष से छुटकारा मिलता है। श्राद्ध में गाय, तिल आदि वस्तुएं दान करने से अलग-अलग फल की प्राप्ति होती है। आइए जानें, विमल जैन ने श्राद्ध में किन वस्तुओं का दान करने को बताया है।

गाय के दान को सभी दानों से उत्तम माना जाता है। श्राद्ध में गाय का दान करने से सुख-शांति और धन-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

श्राद्ध के प्रत्येक कार्य में तिल का महत्व है। जिसके कारण श्राद्ध में तिलों का दान कष्ट और मुश्किलों में रक्षा करता है।

श्राद्ध में गाय का शुद्ध घी बर्तन में रखकर दान करने से परिवार के लिए शुभ होता है।

गेहूं, चावल का दान करना चाहिए। यदि ये अन्न नहीं है तो दूसरा अनाज भी दान किया जा सकता है। संकल्प लेकर दान करने से इच्छित फल की प्राप्ति होती है।

पितृपक्ष में किसी गरीब को जमीन दान करने से धन और संतान की प्राप्ति होती है। यदि किसी के पास दान करने के लिए भूमि नहीं है तो वह इसके स्थान पर थाली में मिट्टी के कुछ ढेले रखकर पंड़ित को दान कर सकते हैं।

वस्त्रों का दान करने से भी शुभ फल की प्राप्ति होती है। धोती और दुपट्टे सहित दो वस्त्रों का दान करना चाहिए। दान करने वाले वस्त्र नए और साफ होने चाहिए।

श्राद्ध में सोने का दान करने से कलह का नाश होता है।

हमारा अस्तित्व हमारे पूर्वजों से है। जब हमारे पूर्वज हमसे रुष्ट रहेंगे तो देवता भी हमारे पास नहीं आ सकेंगे। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार एक वर्ष तक प्राय: सूक्ष्म जीव को नया शरीर नहीं मिलता। इसी कारण मोहवश सूक्ष्म जीव अपने घर एवं परिजनों के इर्द-गिर्द घूमता रहता है। श्राद्ध कर्म से सूक्ष्म जीव को तृप्ति मिलती है। इसीलिए श्राद्ध कर्म किया जाता है।

 

 

 

 

 

 

आज से शुरू हो रहा पितृपक्ष, श्राद्ध में करें इन चीजों का दान, मिलेगा मनचाहा लाभ
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