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पुराणों के तीर्थ स्थलों के बारे में लोगों को करना हैं जागरूक : प्रो शशि रानी

रिपोर्ट- अभिषेक

वाराणसी। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में पुराण वर्णित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में उत्तर प्रदेश के प्रमुख तीर्थ, ऐतिहासिक परंपरा और संस्कृति के बारे में चर्चा की गई। इस अवसर पर प्रोफेसर शशि रानी मिश्रा ने बताया कि इस संगोष्ठी में देश विदेश से लोग आए हुए है। पुराणों में जो तीर्थों का वर्णन किया गया है उसके उद्देश्य को बतालाना है।

प्रोफेसर शशि रानी ने बताया कि इस संगोष्ठी से प्रेरित होकर लोग एक दूसरे के पास आएंगे। तीर्थों का मतलब ये नहीं है कि मंदिर में दी दर्शन कर ले। उन्होंने बताया कि काशी, प्रयागराज, अयोध्या, मथुरा, चित्रकूट जल तीर्थ है। बाकि जो है वो तीर्थ है।

प्रोफेसर ने कहा कि संगोष्ठी में विचारणीय शीर्षक पुराणों में तीर्थराज प्रयाग का वर्णन है। साथ ही काशी की पौराणिक एवं ऐतिहासिक परंपरा व संस्कृति पुराणों में मथुरा का वर्णन अयोध्या की पौराणिक व ऐतिहासिक परंपरा है। संस्कृति पुराणों में सीतामढ़ी का स्थान पुराणों में है। वृंदावन ऐतिहासिक सांस्कृतिक क्षेत्र में चित्रकूट का वर्णन पुराणों में सुखताल से है। तीर्थ पुराणों में विंध्य धाम आदि प्रमुख हैं।

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