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MAU: मात्र 0.2% रह गया कार्बन जीवश्म, जैविक खेती की परंपरा से जुड़ें किसानों को होगा लाभ

मऊ। बीते कुछ सालों से कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए किसानों द्वारा जमकर रासायनिक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग किया जा रहा है। जिसके परिणामस्वरूप कृषि की भूमि में आवश्यक सूक्ष्म तत्वों की भारी कमी देखने को मिल रही है। मिट्टी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले जीवांश कार्बन का प्रतिशत भी कम होता जा रहा है। इसी विषय को लेकर यूपी के जनपद मऊ में इफको द्वारा ‘मृदा जीर्णोद्धार एवं उत्पादकता वृद्धि विचार गोष्ठी’ का आयोजन किया गया। जिसमें इफको व कृषि विभाग के अधिकारियों और वैज्ञानिकों द्वारा किसानों से चर्चा की गई। 

बता दें कि सोमवार को नगर स्थित नगर पालिका कम्युनिटी हॉल में आयोजित गोष्ठी में जिलाधिकारी ज्ञानप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि इफको की तरफ से जैविक खेती पर परिचर्चा की गई,जहां भू संवर्धन और जल संरक्षण के विषय में किसानों को वैज्ञानिकों द्वारा अच्छी जानकारी दी गई। रासायनिक कीटनाशकों और खाद के प्रयोग से मिट्टी ओर अनाज दोनों ही विषाक्त हो रहे हैं। मिट्टी में जीवाश्म कार्बन का प्रतिशत कम से कम 0.7 रहना चाहिए जबकि मऊ जिले में यह मात्र 0.2 प्रतिशत रह गया है। यह चिंता का विषय है। ऐसे में रासायनिक कीटनाशकों और खाद की बजाय पुनः जैविक तत्वों का प्रयोग करना जरुरी हो गया है।

वहीं कृषि उपनिदेशक एसपी श्रीवास्तव ने बताया कि इफको द्वारा कृषि उत्पादकता गोष्ठी आयोजित की गई थी। कृषि की भूमि में सूक्ष्म तत्वों की कमी होती जा रही है। ऐसे में मिट्टी में सूक्ष्म तत्वों को किस प्रकार बरकरार रखके उत्पादकता बढ़ाया जा सके इसपर चर्चा की गई। गाय के गोबर से निर्मित जैविक खाद और प्राकृतिक केंचुए मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं। किसान खेती में लागत बढ़ने और उत्पादन कम होने से परेशान होते हैं। ऐसे में जैविक खेती के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए ऐसे कार्यक्रम लाभकारी सिद्ध कहीं ना कहीं लाभकारी सिद्ध होगा।

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