वाराणसी

अब घर बैठे लोग अपने पूर्वजों का कर सकेंगे पिंडदान, काशी में शुरू हुई ये सुविधा

वाराणसी। मोक्ष की नगरी के रूप में काशी दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां हर साल पितृपक्ष में दूर दूर से लोग अपने पूर्वजों का पिंडदान करने के लिए आते हैं। इसबार कोरोना काल में संक्रमण के खतरे और प्रतिबंधों के चलते लोगों का आना कदाचित संभव नहीं है। इसलिए इसबार पिंडदान के लिए ऑनलाइन के माध्यम को चुना गया है। लोग पिंडदान और अस्थियों के विसर्जन के लिए ऑनलाइन और कोरियर का सहारा ले रहे हैं।

बता दें कि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, और बहुत से विदेशों से भी बनारस में गंगा में अस्थि विसर्जन के लिए कोरियर से अस्थियां भेजी जा रही हैं। पुरोहितों, टूर ऑपरेटरों या अपने परिचितों, रिश्तेदारों के यहां अस्थि भेज रहे हैं। पूरी प्रक्रिया का वीडियो बनाकर संबंधित परिवारों को भेजा रहा है। पिंडदान के लिए भी वीडियो कॉल के माध्यम से ऑनलाइन संकल्प दिलाकर पूजा संपन्न कराई जा रही है।

पिछले दिनों बनारस में ऐसे 20 से ज्यादा उदाहरण देखने को मिले हैं। बनारस के टूर ऑपरेटर ही गया और प्रयागराज में भी ये पूजन और अस्थियों को विसर्जित कराने की जिम्मेदारी ले रहे हैं।पिंडदान व अस्थि विजर्सन या श्राद्ध प्रक्रिया के लिए टूर ऑपरेटरों को ऑनलाइन फीस दी जा रही है। पुरोहितों के खाते में दक्षिणा पहुंच रही है। वाराणसी टूरिज्म गिल्ड के सदस्य संतोष सिंह ने बताया कि पितृपक्ष में कई लोगों ने पिंडदान और श्राद्ध कराने के लिए संपर्क किया है। कोरियर से अस्थियां भेजकर विसर्जित करवाई जा रही हैं। पूरी प्रक्रिया का वीडियो और फोटोग्राफ उनको भेज दिया जाता है।

अब घर बैठे लोग अपने पूर्वजों का कर सकेंगे पिंडदान, काशी में शुरू हुई ये सुविधा
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