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BALLIA: मृत्यु के बिना वापस नहीं जा सकता कोई इस मठ से!

बलिया। आप सभी ने बहुत से मठों के बारे में सुन रखा होगा लेकिन आज हम आपको एक ऐसे मठ के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें एक बार जो महंत बनता है तो वो उस मठ से जीते जी बाहर नहीं आता बल्कि मौत के बाद ही उस परिसर से बाहर निकलता है। जी हां हम बात कर रहे हैं बैरिया में स्थित मुंजी बाबा के मठ की। जानिए क्या है इसके पीछे की पूरी कहानी। 

गौरतलब है कि करीब 500 वर्ष पहले से चली आ रही है यह परंपरा अब तक सभी महंतों ने पूरी ज़िन्दगी मठ परिसर में ही बिता दिया। माना जाता है कि इस मठ की स्थापना करण बाबा ने की थी, जिसमें महंत को जीते ज़िंदगी परिसर में ही बिताने का विधान चला आ रहा है। इस मठ से बाहर नहीं आने की परंपरा 500 वर्ष से चली आ रही है। जब मुंजी बाबा मठ पर आए थे तो तब इनके सिद्धि से इस मठ को काफी प्रसिद्धि मिली थी और तब से यह मठ उनके नाम से जाने लग गए सभी लोग।

मुंजी बाबा मठिया के वर्तमान महान जयनारायण पांडे बाबा ने बताया कि अब से लगभग कुछ वर्ष पूर्व घरभरन पांडे इस मठ के महंत बने थे। उनकी बेटी की शादी हो रही थी ग्रामीणों ने घरभरन बाबा से कहा कि चलकर कन्यादान कर दीजिए बाबा ने कहा कि आप लोग जानते हैं कि इस मठ की परंपरा रही है महंत बनने के बाद मठ  से अर्थी ही बाहर जाती है तो मैं कैसे जा सकता हूं. लोगों ने कहा कि पालकी पर बैठकर चलिए जमीन पर पैर मत रखिएगा। वहीं धरभरन बाबा लोगों की सलाह मानकर अपनी बेटी की कन्यादान देकर वापस अपने मठ के कुटिया पर पहुंचते ही धरती फट गई उसमें से एक काला नाग निकला और बाबा को डस लिया, जिससे कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई वहीं उनकी पुत्री भी विधवा हो गई तब से यह परंपरा चली आ रही है।

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