बैसाखी के सहारे समाज को दे रही नया आयाम, PM MODI ने सुना तो हो गए भावुक

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वाराणसी। खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले , खुदा बन्दे से पूछे बता तेरी रज़ा क्या है, कुछ ऐसी ही मिसाल देती दिखाई दे रहीं लालपुर निवासी पूनम राय, जो पैरों से चल नहीं पाती लेकिन उनके हौंसले अब भी बुलंद हैं। पूनम बैसाखी के सहारे समाज को नया अयाम देने की कोशिश कर रही हैं। फिलहाल पूनम एक संस्था चलाती है जिसमें वो सभी वर्गो के छात्र छात्रायें व छोटे बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने के साथ साथ छात्राओं को आत्मनिर्भर बनने के गुर भी सिखाती हैं। जिसके लिए वो कई बार सम्मानित भी हो चुकि हैं। पूनम एक पेंटिंग आर्टिस्ट हैं। और अपने कला के दम पर देश में काशी का परचम लहराया है। पूनम को सम्मानित करने के दौरान पीएम मोदी ने पूनम की दास्तान सुना और सुनकर भावुक भी हो गये थे।

पीएम के संसदीय क्षेत्र में हेरीटेज योजना व सौन्दर्यीकरण योजना में कलाकृतियों के माध्यम से संदेश देने का काम किया हैं। काशी में दिवारो पर पेटिंग ज्यादातर पूनम के छात्र छात्राओं ने की है।ध् महिलाओं पर होने वाले अत्याचार का एक दृश्य पूनम ने छे फीट की वाल पर 6 हजार महिलाओं की आकृति उकेर कर देश को महिलाओं के प्रति संदेश दिया है। पूनम ने एक से बढ़कर एक पेटिंग करके अपना नाम गिनीज आफॅ बुक में भी दर्ज करवाया है। पूनम अपने घर के सामने एक छोटी सी संस्था बीआर फॉउंडेशन के नाम से चलाती हैं जिसमें क्षेत्र के गरीब वर्ग से लेकर हर वर्ग तक के बच्चों को आर्ट, डांसिग, जूडो कर्राटे सिखाती है साथ ही गरीब बच्चो को हर शिक्षा निशुल्क देती हैं।

पूनम राय भले ही 17 सालों तक बिस्तर पर जिंदा लाश बनकर पड़ी रहीं, लेकिन उनमें जीने और कुछ कर गुजरने का जज्बा नहीं मरा। आज वह पेंटिंग के क्षेत्र में वर्ल्ड रिकार्डधारी हैं। इसी साल फरवरी में पूनम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी और अपनी जिंदगी के मुश्किल पलों को साझा किया था। पूनम की शादी साल 1996 में पटना में एक इंजीनियर से की। शादी के कुछ दिन बाद पूनम को पता चला कि जिसने शादी के वक्त खुद को इंजीनियर बताया था, वह सिर्फ इंटर (12वीं) पास था। फरवरी 1997 में दहेज के विवाद में ससुरालवालों ने पूनम को घर की तीसरी मंजिल से नीचे फेंक दिया, जिससे रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया। उस वक्त पूनम की बेटी प्रिया दो महीने की थी।

नेशनल विजन से बातचीत करते हुए पूनम ने बताया कि मैंने बीआर (बिंदेश्वरी राय) फाउंडेशन की स्थापना की। इस संस्था के जरिए  गरीब बच्चों को शिक्षा में मदद करती हुं।साथ ही मुफ्त में डांस, पेटिंग, जूडो, कर्राटे और योगा सिखाती हुं। इसके साथ ही हमने 2017 में छह फीट लंबे और उतने ही चौड़े कैनवास पर 648 महिलाओं की विभिन्न मुद्राओं को 11 दिन में उकेरकर इंडिया वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया। इसके बाद 2018 में मनाली में मैराथन लांगेस्ट पेंटिंग का अवॉर्ड जीता। इसमें 8 लोगों ने मिलकर 50 फीट लंबे और 5 फिट चौड़े कैनवास पर 3 डिग्री तापमान में पेंटिंग को उकेरी गयी थी।