धर्म / ज्योतिष

नवरात्रि पर कैसे करें कलश स्थापना और क्या है शुभ मुहर्त

शारदीय नवरात्रि में कलश स्थापना का बहुत खास महत्व है। नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहर्त में कलश की स्थापना करने के बाद ही मां की पूजा की शुरुआत की जाती है। कलश स्थापना को सुख-समृद्धि और  मंगलकारी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि कलश के मुख में भगवन विष्णु ,मूल में ब्रह्मा और मध्य में देवी के शक्ति का निवास माना गया है। कलश स्थापना के द्वारा घर में  सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है।  कलश स्थापना के लिए शुभ मुहर्त का ध्यान रखना आवश्यक है।  शुभ मुहर्त का सही समय क्या है वो हम आपको बताते हैं –
कलश स्थापना के लिए शुभ मुहर्त  प्रातःकाल माना गया है।  इस बार सुबह  6:13 से 7:40 बजे तक का समय सर्वश्रेष्ठ बताया गया है।  इसके  अलावा  दोपहर 11:47 से 12:35 बजे तक भी कलश की स्थापना की जा सकती है।

कलश स्थापना की सामग्री:

जौ बोने के लिए शुद्ध साफ़ की हुई मिटटी जिसमें कंकड़ आदि ना हो, जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र, पात्र में बोने के लिए जौ, कलश स्थापना के लिए मिट्टी का कलश या फिर तांबे का कलश ले सकते हैं।  कलश में भरने के लिए शुद्ध जल, गंगाजल, रोली, मौली, पूजा में काम आने वाली साबुत सुपारी,कलश में रखने के लिए सिक्का, आम के पत्ते, कलश ढकने  के लिए ढक्कन, मिट्टी का या तांबे का। ढक्कन में रखने के लिए साबुत चावल, नारियल,लाल कपड़ा और  फूल माला की आवश्यकता पड़ती है।

कलश स्थापना की विधि :

सबसे पहले जौ बोने के लिए एक ऐसा पात्र लें, जिसमें  कलश रखने के बाद भी आस पास जगह रहे। इस पात्र में जौ उगाने के लिए मिट्टी की एक परत बिछा दें। पात्र के बीच में कलश रखने की जगह छोड़कर जौ के  बीज डाल दें, फिर एक परत मिटटी की बिछा दें, एक बार फिर जौ डालें, अब इस पर जल का छिड़काव करें। कलश पर स्वस्तिक बनायें। कलश के गले में मौली बांधें। अब कलश को थोड़े गंगा जल और शुद्ध जल से पूरा भर दें। इसके बाद कलश में साबुत सुपारी , फूल डालें। कलश में सिक्का डालें। अब कलश में आम के पत्ते डालें। चारों तरफ पत्ते लगाकर ढ़क्कन लगा दें। इस ढ़क्कन में अक्षत यानि साबुत चावल भर दें।। नारियल को लाल कपड़े में लपेट कर मौली बांध दें। इस नारियल को कलश पर रखें। नारियल का मुंह आपकी तरफ होना चाहिए। अब यह कलश जौ उगाने के लिए तैयार किये गये पात्र के बीच में रख दें।

कलश स्थापना के बाद मां की पूजा पूरी विधि विधान से की जाती है। इसी के साथ नवरात्रि के नौ दिनों की पूजा की शुरुआत हो जाती है। नवमी के बाद  कलश को हटाया जाता है। कलश में भरे जल का छिड़काव पूरे घर में किया जाता है, जिससे की नकारात्मक शक्ति खत्म हो जाती है।

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