AGRICULTURE: ‘ग्रीन परियोजना’ के अंतर्गत नैनो उत्पाद कृषि को देगा नई दिशा, किसानों को होगा ये लाभ 

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ब्यूरो रिपोर्ट। परंपरागत रासायनिक ख्राद की तुलना में कृषि केनैनो उत्पादों की 50 फीसद कम जरूरत होती है। साथ ही फसलों की 15 से 30 फीसद अधिक पैदावार होती है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है। पर्यावरण हितैषी होने के साथ साथ इसके प्रयोग से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आती है। नैनो संरचना से तैयार किए गए ये उत्पाद पौधों को प्रभावशाली पोषण देते हैं। नैनो उत्पादों के उपयोग के कई फायदे हैं।

बढ़ाई जा सकती है खेती की पैदावार
दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी संस्था इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर्स कापरेटिव (इफको) ने रविवार को नैनो नाइट्रोजन, नैनो जिंक व नैनो कापर उत्पाद क्षेत्र परीक्षण के लिए जारी किए। इनके इस्तेमाल से खेती की पैदावार में 30 फीसद तक की वृद्धि संभव है। केंद्रीय उर्वरक एवं रसायन मंत्र डीबी सदानंद गौड़ा ने आज उर्वरक क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी संस्था इफको की मातृ इकाई गुजरात के कलोल में एक समारोह में नैनो प्रौद्योगिकी आधारित नैनो नाइट्रोजन, नैनो जिंक और नैनो कापर का लोकार्पण किया। उन्होंने इन उत्पादों के क्षेत्र परीक्षण करने की भी घोषणा की। गौड़ा ने कहा कि नैनो उत्पाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘ग्रीन परियोजना’ है। इसकी मदद से न केवल किसानों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी बल्कि इससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा और पर्यावरण की सुरक्षा के साथ ही ग्रीन हाउस गैसों का भी कम उत्सर्जन होगा। इन प्रयासों के लिए उन्होंने इफको की प्रशंसा करते हुए कहा कि उर्वरक क्षेत्र में नए-नए प्रयोग जारी रहने चाहिए जिससे किसानों के लागत खर्च को कम किया जा सके।

इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से आमंत्रित 34 प्रगतिशील किसानों ने भी हिस्सा लिया। इनमें कई पद्मश्री से सम्मानित किसान भी शामिल हुए। किसानों को नैनो उत्पादों की इस नई श्रृंखला से परिचित कराया गया और उनके पूरे देश में परीक्षण की जानकारी दी गई। इन नैनो उत्पादों को इफको के कलोल इकाई के अत्याधुनिक नैनो बायो टेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर में देसी तकनीक से विकसित किया गया है।