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Mother’s day special: बेबस मां तुझे सलाम

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रिपोर्ट-सौम्या

ब्यूरो रिपोर्ट। पूरी दुनिया हर साल मई के दूसरे हफ्ते को मदर्स डे के रूप में मनाती है। इस बार मदर्स डे ऐसे समय में पड़ा है जब कोरोना की वजह से सब लॉकडाउन हो रखा है। अभी तक हमने यही देखा है कि इस दिन हर बच्चा अपनी मां को स्पेशल फील कराने के लिए हर जतन करता है, लेकिन आज कोई बच्चा नहीं बल्कि मां ही इस मदर्स डे पर अपने बच्चे को तोहफा देने की कोशिश में मीलों का ये सफर ये सोचकर तय करने में जुटी हुई है कि उसका बच्चा सही सलामत रहे और दुनिया को देखे।

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जहां जब आज पूरा देश लॉक डाउन हो रखा है और लोग देश के कोने-कोने में फंसे हुए हैं तो वहीं ज़िंदा रहने के लिए लोग बिना कुछ सोचे बस सफर पर निकल पड़े हैं शायद इस उम्मीद में कि अपने गांव-शहर पहुंच गए तो जिन्दा रहेंगे। रोज ही टीवी में ऐसी तमाम तस्वीरें हम और आप देखते हैं जिसमें लोग अपने बच्चों को गोदी और कंधे पर बिठाकर उस सफर में निकल पड़ें हैं जिसकी उम्मीद बस इतनी सी है कि वो अपने गंतव्य तक किसी तरह पहुंच जाएं । उन्हीं में बहुत सी ऐसी महिलाएं या यूं कहें कि माँ हैं जो नंगे पांव भरी दोपहर में भी अपने बच्चे को गोदी में लिए मीलों के सफर पर निकल चुकी हैं चेहरे पर कोई मायूसी नहीं बल्कि मुस्कान लिए, ताकि उनका बच्चा जब उनका हंसता हुआ चेहरा देखे तो वो भी मुस्कुरा दें। अपने सारे कष्ट को उस मुस्कान के पीछे छुपाये ये मायें बस चल पड़ी हैं।

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ऐसे ही नहीं इन्हें मां कहा जाता है। ये माताएं हर कष्ट को ख़ुशी-ख़ुशी सह लेती हैं सिर्फ अपने बच्चे की खातिर। उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता क्या गर्मी क्या बरसात। बस निरंतर चलती जा रही हैं अपने बच्चे को सुरक्षित पहुंचाने के लिए। ‘माँ’ की ममता और उसके आँचल की महिमा को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है, उसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। तभी तो रामायण में भी भगवान श्रीराम ने कहा है कि ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गदपि गरीयसी।’ अर्थात, जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है।

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तो क्या ऐसे में आज ऐसी मां को तोहफा नहीं मिलना चाहिए हमारे देश और देश के लोगों से, हमारी सरकार से। इनके इस जज्बे को नेशनल विजन सलाम करता है जो इतने संघर्षों के बावजूद भी मीलों का सफर मुसकुराते हुए तय कर रही हैं। ऐसे में  सरकार को भी चाहिए कि ऐसी मांओं को इस मदर्स डे पर कुछ ऐसा तोहफा दें कि वो आगे का जो सफर है उसको आसानी से पूरा कर अपने गंतव्य तक पहुंच सके तभी कहीं ना कहीं सच्चे अर्थों में मदर्स डे अपने आप में पूरा माना जायेगा।

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