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VARANASI: आज ही के दिन खुलता है मां का दरबार, एक सिक्के से बदलती है किस्मत

वाराणसी। मां का ऐसा दरबार जहां श्रष्टि के पालनहार महादेव ने भी मांगी थी भिक्षा। मां अन्नपूर्णा की ऐसा कृपा की इस नगरी में कोई भी इंसान भूखा नहीं सोता। साल में एक दिन धनतेरस को बटता है मां का अदभुत खजाना ।तिरुपति बाला जी हो या सिरडी के साईं बाबा या फिर सिद्धि विनायक जी का दरबार आपने यहां के खजाने के बारे में जरुर सुना होगा लेकिन कभी ऐसा सुना है क्या की भगवान के दरबार का खजाना भक्तों के लिए खोला जाता है और भक्तों में बंटता है। ऐसा खजाना जो केवल साल में एक बार खुलता है, जो इस खजाने से मिले लावे और सिक्के को घर में रखता है उसके घर में धन और धान्य की वृद्धि होती है ।

इस खजाने से मिले लावे को अगर आप अपने घर के अन्न की डिब्बे में रख दे तो पूरे परिवार को  कभी भूखे नहीं सोना पड़ेगा ।ये चमत्कार होता है बाबा काशी विश्वनाथ दरबार से कुछ ही दूरी पर स्थित मां अन्नपूर्णा के दरबार में जहां  पूरे साल में केवल धनतेरस के दिन मां  का खजाना खुलता है और भक्तों में बंटता है ।अन्नपूर्णा मंदिर महंत रामेश्वर पूरी ने बताया कि  दीपावली से पहले पड़ने वाले धनतेरस के दिन मां  का अनमोल खजाना खोला जाता है । श्रद्धालुओं  में इसकों साल में केवल एक दिन धनतेरस के दिन बांटा जाता है, जिसके पीछे की मान्यता है की इस खजाने के पैसे को अगर अपने घर में रखा जाये और लावे को अन्न पेटी में तो कभी किसी चीज कि कमी नहीं होती हैं ।

अन्नपूर्णा मंदिर महंत रामेश्वर पूरी  ने बताया केवल इसी दिन भक्तों को मां  के स्वर्ण प्रतिमा के दर्शन होते है । जिसका इंतजार लोग साल भर करते है।महंत रामेश्वर पूरी ने बताया की पुराणों में वर्णित है की एक बार जब काशी में अकाल पड़ा था चारों  ओर त्राही त्राही मची थी लोग भूखों मर रहे थे उस समय शिव को भी समझ ने नहीं आ रहा था की इस नगरी में ये क्या हो गया।ध्यान मग्न होने पर भगवान शिव को राह दिखी की मां अन्नपूर्णा ही बचा सकती है  तब शिव खुद मां  के पास जाकर  भिक्षा मांगते है । माता ने उसी वक्त शिव को वचन दिया की आज के बाद कोई भी इस नगरी में भूखा नहीं रहेगा और मेरा खजाना पाते  ही लोगों  के दुःख दूर हो जायेंगे । धनतेरस के दिन से चार दिन तक मां का दरबार भक्तों के लिए खुलता है। लाखों की संख्या में भक्तों की भीड़ हर साल मां के दरबार में अपने किस्मत को बदलने के लिए इकठ्ठे होते हैं।

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