महाराष्ट्र मामले में सुप्रीम कोर्ट में कल होगी सुनवाई,कोर्ट ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को जारी किया नोटिस

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राजनीति का खेल भी अजब खेल है| कब क्या हो जाये ये कोई नहीं जानता ,यहाँ सब कुछ और कुछ भी हो सकता है जो समझ से परे है| बीते दिन की बात करें तो अजीत पवार जब बैठक में थे तो उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बन रहे थे लेकिन अगली सुबह देवेन्द्र फडणवीस फिर मुख्यमंत्री बन गए |शिवसेना-कांग्रेस और एनसीपी ने जमकर विरोध किया और देखते देखते मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच में चला गया | बता दे कि सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी ने याचिका दाखिल कर महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के उस आदेश को रद्द करने की मांग की है| जिसमें उन्होंने सूबे में सरकार बनाने के लिए देवेंद्र फडणवीस को आमंत्रित किया था, इस मामले को लेकर रविवार को सुनवाई होनी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र मामले आज कोई फैसला नहीं सुनाया, अदालत इस मामले पर कल सुबह सुनवाई करेगा | कोर्ट ने शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की याचिका पर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया है| इसके साथ ही तुषार मेहता को सोमवार सुबह तक फडणवीस और अजित पवार का समर्थन पत्र दिखाने को कहा है,साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार से राज्यपाल के आदेश को भी मांगा है|

सुप्रीम कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें

शिवसेना की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल ने कहा कि हमने कर्नाटक में भी इसे देखा है। यदि भाजपा के पास बहुमत है, तो उन्हें अपना बहुमत साबित करने दें| उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के लोगों को सरकार चाहिए। हम कह रहे हैं कि हमारे पास बहुमत है। हम इसे साबित करने के लिए तैयार हैं। वही भाजपा के लिए अपनी दलील मुकुल रोहतगी ने कहा कि आदेश पारित करने के लिए अदालत की आवश्यकता नहीं है। साथ ही कहा कि गवर्नर के फैसले में कोई अवैधता नहीं थी। कोर्ट को फ्लोर टेस्ट की तारीख तय करने का आदेश पारित नहीं करना चाहिए। कुछ चीजें ऐसी हैं जो राष्ट्रपति के पास हैं जो न्यायिक हस्तक्षेप के लिए भी खुली नहीं हैं।

किस क़ानून के तहत पहुचे कोर्ट

बता दे कि सभी नागरिकों को संविधान में मौलिक अधिकार दिए गए हैं| अगर किसी के मौलिक अधिकारों का हनन होता है, तो वह अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट आ सकता है और रिट पिटीशन फाइल कर सकता है| और शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी ने अनुच्छेद 14 के तहत मिले मौलिक अधिकारों के उल्लंघन को आधार बनाकर अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में रिट पिटीशन दायर की है. यह इस तरह का पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं|न्यायमूर्ति एनवी रमना, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की संयुक्त याचिका पर सुनवाई की।

किसके पास कितने है विधायक

बता दे की महाराष्ट्र चुनाव में भाजपा को 105, शिवसेना को 56, राकांपा को 54 व कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं। भाजपा का दावा है कि उसने 14 निर्दलीयों और अजीत पवार के नेतृत्व में राकांपा के विधायकों के सहारे बहुमत के लिए जरूरी संख्या 145 जुटा ली है। लेकिन अभी तक ये साफ नहीं है कि राकांपा के कितने विधायक अजीत पवार के साथ हैं। वही शरद पवार ने 49 विधायक अपने साथ होने की बात कही है।