धर्म / ज्योतिष

जानिए कैसे मिलती है प्रदोष व्रत से आरोग्य, सौभाग्य और सुख समृद्धि

ब्यूरो डेस्क। हिन्दू शास्त्र में प्रदोष व्रत भगवान शिव की महा कृपा पाने का दिन माना गया है। प्रदोष व्रत करके कोई भी भक्त अपने मन की इच्छा को बहुत जल्द पूरा कर सकता है। हर महीने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। इस बार अश्विन माह के शुक्लपक्ष को किया जाने वाला प्रदोष व्रत 11 अक्टूबर, शुक्रवार को पड़ रहा है। शिव पुराण के अनुसार शिवरात्रि के बाद भगवान शिव की पूजा के लिए किया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण व्रत प्रदोष ही है।

वार (दिनों) के अनुसार प्रदोष व्रत के लाभ :
ज्योतिषाविद विमल जैन ने बताया कि प्रत्येक दिन के प्रदोष व्रत का अलग-अलग प्रभाव है, जैसे रवि प्रदोष-आयु एवं आरोग्य लाभ के लिए। सोम प्रदोष-शांति एवं रक्षा एवं प्रदूषण से मुक्ति के लिए। बुध प्रदोष-मनोकामना की पूर्ति के लिए। गुरु प्रदोष-विजय प्राप्ति के लिए। शुक्र प्रदोष -आरोग्य सौभाग्य एवं मनोकामना की पूर्ति हेतु। शनि प्रदोष -पुत्र सुख की प्राप्ति मनोरथ की पूर्ति के लिए की जाती है। 11 प्रदोष व्रत अभीष्ट की पूर्ति हेतु होने तक प्रदोष व्रत रखने की धार्मिक मान्यता है।

ऐसे रखें प्रदोष व्रत :
ज्योतिषचार्य विमल जैन ने बताया कि व्रतकर्ता को प्रातकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर समस्त दैनिक कार्यों से निवृत्त होकर स्नान ध्यान करना चाहिए। इसके पश्चात अपने दाहिने हाथ में जल लेकर प्रदोष व्रत का संकल्प लेना चाहिए। दिन भर निराहार रहकर स्नान करके प्रदोष काल में भगवान शिव जी की विधि विधान पूर्वक पूजा करना चाहिए। प्रदोष व्रत से सभी मनोकामना की पूर्ति के साथ-साथ जीवन में सुख समृद्धि व खुशहाली मिलती है। जीवन के समस्त दोषों का शमन हो जाए है यह व्रत महिला एवं पुरुष दोनों के लिए समान रूप से फलदाई है।

कैसे करें व्रत और पूजा :
अश्विन माह के शुक्लपक्ष को पड़ने वाले प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा की जाती है। यह व्रत निर्जल यानी बिना पानी के किया जाता है। प्रदोष व्रत की विशेष पूजा शाम को की जाती है। इसलिए शाम को सूर्य अस्त होने से पहले एक बार फिर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ़ सफेद रंग के वस्त्र पहन कर पूर्व दिशा में मुंह कर भगवान की पूजा की जाती है।

सावधानियां और नियम :
अपने घर पर आई हुई सभी स्त्रियों को मिठाई खिलाये और जल भी जरूर पिलाएं।
घर में और घर के मंदिर में साफ सफाई करके ही पूजन करें।
भगवान शिव की पूजा में काले गहरे रंग के वस्त्र न पहनें।
सारे व्रत विधान में मन में किसी तरीके का गलत विचार ना आने दें।
अपने गुरु और पिता के साथ सम्मान पूर्वक बात करें।
सारे व्रत विधान में अपने आप को भगवान शिव को समर्पण कर दें और जल का सेवन ज्यादा करें।

Click to comment

You must be logged in to post a comment Login

Leave a Reply

Most Popular

To Top