जानिए : किन-किन कारणों से CAA+NRC+NPR नहीं लागू कर सकती सरकार

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रिपोर्ट- ्श्री कान्त

ब्यूरो रिपोर्ट । सबसे पहले NRC फिर CAAऔर अब NPR सरकार लेकर आई है ।वही जनता लगातार डर के घेरे में घिरती जा रही है । उसको यह डर सताता जा रहा है कि कहीं अगर वह किसी भी प्रकार से अपने आप को भारतीय साबित करने में नाकाम हुआ तो उन्हें फिर किसी शरणार्थी कैंप में रख दिया जाएगा या फिर दूसरे देश में भेज दिया जाएगा ।लोगों के बीच में इतना डर पैदा हो गया है कि वह अब वकीलों का सहारा ले रहे हैं उनसे पूछ रहे हैं कि उन्हें और कौन से डॉक्यूमेंट चाहिए यह साबित करने के लिए कि वह भारतीय ही है ।

ऐसे में लोग तरह-तरह के ठगी का भी शिकार हो रहे हैं और एजेंटों के चक्कर में भी आ जा रहे हैं और अपनी गाढी कमाई लूटा दे रहे हैं लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि सरकार ने अब तक किसी भी प्रकार का कोई भी डॉक्यूमेंट रिलीज ही नहीं किया है |जिसमें हमारी भारतीय होने की शर्ते निहीत हो , तो वहीं इसके विपरीत NRC के डर से टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक वेस्ट बंगाल में 2 लोगों ने आत्महत्या तक कर लिया है तो वहीं हार्ट अटैक के कारण अब तक 3 लोगों की मौत भी हो चुकी है , तो सबसे पहले जो लोग मेरा यह वीडियो देख रहे हैं उनसे मैं अपील करता हूं कि आप अपने मन से , अपने दिल से दिमाग से NRC,CAA,NPR जैसे विषयों से अपना डर निकाल दें | यह किसी जाति विशेष के लिए नहीं लागू किया जा सकता ।

 तो आइए सबसे पहले हम जान लें आखिर एनआरसी है क्या ? तो मैं आपको बता दूं कि NRC जो है वह सबसे पहले आसाम में लागू किया गया था जिसका पूरा नाम नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजनसीप है | इसका सीधा मतलब हम जिस मुल्क में रहते हैं उसके बाशिंदे या फिर नागरिक कौन है? उसका रजिस्टर है | जिसमें यह सब दर्ज किया जाएगा , अब सबसे बड़ी और ध्यान देने वाली बात यह है कि जो NRC आसाम में लागू किया गया वह भारत के हर हिस्से में नहीं लागू की जाएगी, साथ ही दोनों में काफी अंतर भी होगा | अगर एनआरसी लागू होता है तो हम लोग जो हैं जिसको हम कह रहे है सिटीजनशिप एक्ट 1955 जोकि पेरेंट्स एक्ट है उसके तहत होगा और उसके अंदर एक संशोधन हुआ जो कि शायद 10 वां संशोधन है जिसको हम सिटीजनशिप संशोधन कानून 2019 कह रहे हैं ।

 लेकिन इसका पेरेंट्स एक्ट जिसका असल एक्ट 1955 में ही शुरू हुआ था तो ऐसे में भारत के अन्य हिस्सों में 1955 एक्ट के तहत कानून लागू होगा ना कि आसाम की तरह 1971 का | मैं आपको बता दूं अगर NRC लागू भी होता है तो वह ना ही इतना आसान है और ना ही पूरी प्रक्रिया को आसानी से पूरा किया जा सकता है । ऐसा मैं क्यों कह रहा हूं आइए यह भी जान लें जैसे हेलमेट पहनना कानून है ,एक्ट है । यह हमारी सुरक्षा के लिए है अब अगर हमें हेलमेट नहीं अच्छा लगे तो हम क्या करेंगे । लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं हो सकता कि हम हिंसा पर उतर आए और सरकारी संपत्तियों को निस्ते नाबूत करना शुरू कर दें । ठीक उसी तरह CAA कानून है और यह हमारे समाज को सुरक्षित करने के मद्देनजर बनाया गया है , हो सकता है कि इसमें कुछ संशोधन की आवश्यकता हो लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि जो पिछले कुछ दिनों से देश में चल रहा है वह सब कुछ बिल्कुल अच्छा हो रहा है और सबसे बड़ी चिंता की बात तो यह है कि यह सब बस कुछ गलत जानकारी की वजह से हो रहे हैं ।

 जैसे NRC और मुस्लिम दोनों को जोड़कर देखा जा रहा है । लेकिन सच तो यह है कि NRC और मुस्लिम दोनों का कुछ लेना-देना नहीं है बल्कि कुछ हद तक CAA और मुस्लिम का संबंध है अब रही NRC की बात तो NRC भारत में रह रहे सभी धर्म यानी वह हिंदू हो सिख हो इसाई हो या फिर मुस्लिम हो या जैन ,पारसी या वो नास्तिक हो या फिर आस्तिक कोई भी हो सभी पर लागू होता है NRC | अब CAA की बात करें तो आपको बता दूं CAA का एक्ट 1955 का एक्ट है और यह अभी तक 10 बार संशोधित किया जा चुका है यानी कि 1986 उसके बाद 1987 जिसमें जुलाई तक जो पैदा होंगे उसके बाद 2003 में संशोधन हुआ उसके बाद 2013 में उसके बाद वह 2016 में और अभी 2019 में संशोधन हुआ जिसे हम देख रहे हैं और आगे भी होने की संभावना है लेकिन हमारे यहां CAA और NRC को लेकर ऐसा हौवा फैला दिया गया कि माहौल ही कुछ और हो गया | जिसका प्रमुख कारण भारत में साक्षरता की कमी है |

 ऐसे में जहां 24% आबादी भारत की अशिक्षित है उनका क्या होगा , यानी व पिछड़े वर्ग जिसमें आदिवासी sc,st,obc यह लोग सबसे ज्यादा घेरे में आएंगे ना कि केवल मुस्लिम और हां खासतौर से जो ज्यादा गरीब हो वह चाहे किसी भी जाति धर्म के क्यों ना हो वो भी इस घेरे में सबसे ज्यादा आयेंगे , क्योंकि ना ही वह पढ़े लिखे होंगे और ना ही उनके पास कोई पुख्ता सबूत होगा यह सबित करने के लिए कि वह भी भारत के ही नागरिक है, क्योंकि आदिवासी समुदाय जिनकी जिंदगी खानाबदोश की तरह होती है उनके पास तो कुछ भी नहीं होता तो सबसे ज्यादा समस्या इनको होने वाली है , ऐसे में भारत जो वर्तमान समय में 100 तरह की समस्याओं से घिरा है वह और भी NRC के कारण परेशान होगा वहीं अगर हम आसाम की NRC की बात करें तो आसाम को कुल 10 साल लगे वहां NRC लागू करने में और साथ ही 1200 से 1600 करोड़ रुपए खर्च हुए और 52000 लोगों ने 10 साल तक काम किया , तब जाकर कहीं NRC बनकर तैयार हुआ । जिसे पूरी तरह से सही नहीं माना जा सकता , इसमें कुल 3 करोड़ 10 लाख लोगों को रजिस्टर किया गया |

 ऐसे में हम बात करें अगर 130 करोड़ लोगों की तो यह कैसे कल्पना की जाएगी की सरकार NRC को पूरे भारत में लागू करने में सक्षम दिख रही है | अगर लागू कर भी देती है तो जो NRC से बाहर होंगे अगर उनकी संख्या 2 से 5 करोड़ हो गई , तो क्या सरकार एक नया देश बनाएगी या फिर उनको कुछ ही समय के लिए ही सही किसी ना किसी शरणार्थी कैंप में रखेगी ही ,तो क्या सरकार उनके रखने, खाने का खर्च उठाने में सक्षम है । क्योंकि वह लोग तो पूरी तरह से ही सरकार पर ही निर्भर हो जाएंगे ऐसे में सरकार को ही उनका पूरा इंतजाम करना होगा , जब तक उनका फैसला ना हो जाए | जिससे आप खुद अंदाजा लगा ले कि यह योजना कितनी धरातल पर सही साबित होगी ।

 अब एक बार फिर आपको आसाम की याद दिला दूं तो आसाम में जो NRC लगी उसके तहत 19 लाख लोग ऐसे निकले जो अपनी नागरिकता नहीं साबित कर पाए और आपको जानकर आश्चर्य होगा कि उनमें से 13 लाख से ज्यादा हिंदू और छह लाख मुस्लिम है ऐसे में हम यह किस आधार पर कह सकते हैं कि यह मुस्लिम विरोधी कानून है । अब डॉक्यूमेंट की बात करें तो हो सकता है कि आपके पास दस्तावेज हो लेकिन वह कितना त्रुटिमुक्त है उस पर भी गौर करने वाली बात है सीधे तौर पर अगर मेरे आधार कार्ड पर कुछ जानकारी गलत है तो उसको बदलने के लिए मात्र ..इतनी समस्या होती है कि हमारा होश ही उड़ जाता है ,इसकी सबसे बड़ी वजह है सरकारी विभाग का आपस में कनेक्ट ना होना है । जिससे आधार में चेंज कराने पर फिर पैन में फिर वोटर कार्ड तो कहीं राशन कार्ड तो कहीं मार्कशीट तो कहीं पासपोर्ट इत्यादि सभी में परिवर्तन करवाना ही पड़ जाता है ।

 उस पर अंग्रेजी की समस्या यानी गलत अंग्रेजी शब्दों के कारण सबसे ज्यादा समस्या होती है इसका पूर्ण निवारण हो पाना लगभग नामुमकिन है , यानी अगर मेरा नाम SRI KANT है इसकी स्पेलिंग S R I K A N T होगी । लेकिन गलती से वह S..H..R..I  K..A..A..N..T..हो गया तो फिर भागम भाग लग जाएगी । वही इंडिया टुडे के अनुसार मात्र अंग्रेजी शब्दों के गलत तरीके से लिखे होने के कारण लाखों लोगों के नाम आसाम के NRC लिस्ट से बाहर हो गए । उसके बाद NRC न लागू हो पाने की वजहो में से एक वजह भ्रष्टाचार भी है जी हां जिसमें भारत विश्व के 180 देशों में 78 व स्थान पर है ऐसे में भारत का नाम बिना भ्रष्टाचार के नाम लिए पूरा नहीं होता । ऐसे में हम निष्पक्ष NRC लिस्ट की परिकल्पना भी कैसे कर सकते हैं । FOR EXAMPLE आसाम जहां बहुत सारे लोग जो मिलिट्री कैंपों में काम कर चुके हैं जो फोर्स में काम कर चुके हैं उनके खानदान में लोग बड़े बड़े लीडर एमपी एमएलए और पॉलिटिशियन रह चुके हैं उनका एक बच्चे का नाम तो NRC लिस्ट में हो गया तो वही दूसरे का नाम नहीं हो पाया कहीं पत्नी का नाम चल गया तो कहीं पति का नाम छूट गया क्या है ये यह यह करप्शन नहीं तो और क्या है ।

 ऐसे में NCBI की एक रिपोर्ट के मुताबिक मैं आपको बता दूं कि एक कैदी को संभालने में लगभग सरकार सलाना ₹4 लाख खर्च करती है बावजूद इसके कि वो कैदी खुद भी जेल में कमाते हैं तब भी इतना खर्च । ऐसे में एक शरणार्थी जिसे NRC के लिस्ट से बाहर निकाला जाएगा उसका कितना होगा और अगर संख्या 5 करोड़ होगी तो कितना खर्च होगा जाहिर सी बात है कि यह पैसा जो खर्च किया जाएगा उन पर ,वह आम जनता के इनकम टैक्स का ही पैसा होगा इसका सही उपयोग करना भी सरकार का ही फर्ज बनता है कि अब समझ लेते हैं कि भारत का नागरिक कौन होता है तो मैं आपको बता दूं कि भारत में नागरिकता हासिल करने के 5 तरीके हैं ।

  पहला जन्मजात दूसरा आपके पूर्वजों की वजह से तीसरा रजिस्ट्रेशन की वजह से चौथा नेचुरल रिलोकेशन और पांचवा इनकार्पोरेशन । इसमें प्रमुख दो ही है जिसमें जन्मजात और पूर्वजों की देन ही है जो भारत की नागरिकता साबित करती है इसके तहत पैरंट्स एक्ट 1955 सेक्शन 3 आता है जो यह कहता है कि हर व्यक्ति जो भारतवर्ष में है और जो 26 जनवरी 1950 से जो पैदा हुआ से लेकर 30 जून 1987 तक जो लोग पैदा हुए हो जन्मजात भारत के नागरिक हैं , वही दूसरा कानून कहता है कि जो लोग 1 जुलाई 1987 से लेकर 2003 में जब तक लोग पैदा हुए और लोग भी नागरिकों के साथ बस इतना है कि इनके माता या पिता कोई एक भारतीय होना चाहिए वहीं तीसरा कानून कहता है कि अगर कोई 2003 के बाद पैदा हुआ है जहां उसके माता और पिता दोनों हिंदुस्तानी नागरिक है या फिर कोई एक भारतीय है या फिर दूसरा माता या पिता अवैध घुसपैठिया नहीं है तो वह भी नागरिक है

चलिए अब जान लेते हैं कि NRC और NPR का क्या संबंध है तो मैं आपको बता दूं कि सेंसेस ऑफ इंडिया 2011 के मुताबिक NRC आने से पहले NPR यानी नेशनल पापुलेशन रजिस्टर बनेगा और NPR के आधार पर NRC तैयार किया जाएगा अब NPR क्या है तो सरकारी वेबसाइट के अनुसार हर कोई व्यक्ति जो 6 महीने से ज्यादा या 1 साल से ज्यादा भारत में रुका हुआ है उसका नाम इस रजिस्टर में आना चाहिए यह पापुलेशन का रिकॉर्ड है चाहे आप किसी और मुल्क से आए हो और यहां वैध तरीके से रह रहे हैं चाहे वह लॉन्ग टर्म या फिर सार्ट टर्म वीजा के थ्रू ही क्यों ना हो ।

 आप अपना नाम NPR लिस्ट में शामिल कर सकते हैं , ताकि भारत में कितनी पॉपुलेशन है उसका सही आकलन किया जा सके NPR के अंदर हमारी डेमोग्राफिक इंफॉर्मेशन ,लोकेशन जिसमें परमानेंट ,टेंपरेरी एड्रेस लिया जाएगा दूसरा हमारी पर्सनल इनफॉरमेशन भी ली जाएगी जिसमें हमारा नाम पिता का नाम माता का नाम इत्यादि होंगे इससे पहले यह 2011 में हो चुका है , हां इसमें बायोमेट्रिक इंफॉर्मेशन भी ली जाएगी । जो ऑलरेडी ली जा चुकी है और मैं आपको बता दूं कि अप्रैल 2020 से यह प्रक्रिया चालू कर दी जाएगी और NPR की प्रक्रिया को 6 महीने में खत्म कर देना है ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यह राह नहीं आसान.. चलने को ये गालीब कितने आए और खो गए । अब देखना यह है कि क्या सरकार इस कानून को वाकई में अमली जामा पहना पाती है या फिर यह भी एक मात्र कानून ही बनकर रह जाएगा ।