झारखंड ने बीजेपी को नकारा, महागठबंधन को दिया बहुमत

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रिपोर्ट-अंकित सिंह
झारखंड। साल के आखिरी महीने में झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद कांग्रेस गठबंधन के खेमे में जहां खुशी देखने को मिल रही है, वहीं बीजेपी के खेमे में सन्नाटा पसरा हुआ है। गठबंधन के पक्ष में नतीजे आने के बाद एक बार फिर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है।

इस विधानसभा चुनाव में भले ही जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी हो, लेकिन कोई भी पार्टी अपने दम पर सरकार नहीं बना पाएगी। झारखंड के राजनीतिक इतिहास में अब तक कोई भी सत्ता पर आसीन होने के बाद दोबारा उस पर काबिज नहीं हो सका है।

81 विधानसभा वाले राज्य झारखंड में हुए चुनाव के आ रहे रूझान में अब तक कांग्रेस गठबंधन पार्टी ने 46 सीट, तो बीजेपी के पाले में 25 सीट, झारखंड विकास मोर्चा को (JVM) 3 और ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन पार्टी (AJSU) को 3 सीट पर जीत मिलती दिखाई दे रही है। वहीं अन्य के खातों में 4 सीटें आई हैं। बता दें कि झारखंड में सरकार बनाने के लिए 41 सीटों की जरुरत पड़ती है।

झारखंड के नौवें मुख्‍यमंत्री रह चुके हेमंत एक बार फिर मुख्‍यमंत्री बनने की राह पर हैं। वर्ष 2013-2014 में उन्‍होंने झारखंड में झामुमो गठबंधन की सरकार चलाई थी। हेमंत सोरेन ने विपक्षी महागठबंधन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भाजपा से नाराज वोटरों को अपने पक्ष में लाने में अहम भूमिका निभाई है। इसका असर पार्टी के पक्ष में आ रही सीटों से लगाया जा सकता है।

झारखंड 15 नवंबर 2000 को बिहार से अलग होकर एक नया राज्य बना। 19 साल के इस सफर में झारखंड अब तक 10 मुख्यमंत्री देख चुका है। बीजेपी से रघुवर दास पहले मुख्यमंत्री हैं,जिन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया है। इसके बावजूद भी वह फिर से राज्य में सरकार बनाने में सफल नहीं हो सके।

यह कहना गलत नहीं होगा कि जहां बीजेपी एक बार फिर से पांच साल तक झारखंड में सरकार बनाने की फिराक में थी। वहीं महाराष्ट्र के बाद बीजेपी की यह दूसरी हार हैं। राजनीति के पंडित यह मान रहे थे कि बीजेपी झारखंड में अकेले चुनाव लड़कर आने वाले समय में यही दाव बिहार विधानसभा में भी खेलने के फिराक में थी,लेकिन यह नीति बदल गई। बीजेपी के इस विजय रथ को रोकने में झारखंड के चौथे और पांचवें चरण की वोटिंग में सीएए का मुद्दा अच्छा खासा असर डाला है।

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेता हेमंत सोरेन ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह जीत मेरी नहीं बल्कि जनता की है। झारखंड की जनता ने मुझे बहुमत दिया है। उसके लिए उनका अभिनंदन। आज का दिन मेरे लिए संकल्प का दिन है। किसी भी वर्ग के लोगों की उम्मीद नहीं टूटेगी।