पहली महिला फौज का गठन करने वाले थे ये

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वाराणसी गुलामी की जंजीर से भारत को आजाद कराने में अपनी अहम भूमिका का निर्वहन करने वाले आजाद हिन्द फौज के संस्थापक नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के बारे ऐसी कई बातें हैं जिनको आज भी लोग नहीं जानते हैं। ऐसी ही कुछ रोचक जानकारियों को हम आज आपके साथ सांझा करेंगे। 

बहुत कम लोग ही होंगे जिन्हें यह जानकारी होगी कि नेता जी ने आजाद हिन्द फौज में महिलाओं का एक संगठन तैयार किया था,जो दुनियां की पहली महिला फौज के नाम से जाना जाता है। 1938 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय योजना आयोग का गठन किया था।

23 जनवरी को पूरे देशवासी सुभाषचन्द्र बोस जयंती के रूप में मनाते हैं। क्योंकि 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में एक बंगाली परिवार में नेता जी का जन्म हुआ था और उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस व माता का नाम प्रभावती था। छ बहनों व आठ भाइयों में सुभाषचन्द्र बोस नौवे स्थान पर थे।

नेता जी द्वारा 21 अक्टूबर 1943 को बनाये गये आजाद हिन्द फौज का देश की आजादी में स्वर्णिम योगदान रहा। उनकी फौज के प्रतीक चिन्ह के रूप में झंडे पर बाघ का चित्र बना था,जो उनकी फौज की शक्ति का प्रमाण था। नेता जी द्वारा वर्मा में दिया गया नारा ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ ने भारतीय इतिहास में इतना बड़ा परिवर्तन लाया कि मजबूर होकर अंग्रेजों को भारत छोड़कर भागना पड़ा। उनके पिता ने अंग्रेजों के दमनचक्र के विरोध में ‘रायबहादुर’ की उपाधि लौटा दी थी। इससे सुभाषचंद्र बोस के मन में अंग्रेजों के प्रति कटुता ने घर कर लिया, जिसके बाद उनका एक ही धेय बन गया था और वो था अंग्रेजों को हर हालत में भारत से बाहर हमेशा के लिए खदेड़ना।