इन्होंने अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ जाकर किया ऐसा काम

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ब्यूरो डेस्क। हमारें देश को अंग्रेजों की गुलामी से अजादी दिलाने के लिए न जाने कितने ही महान पुरूषों ने लड़ाईयां लड़ी, आंदोलन किये, कितनों ने अपने जान ​की बाजी लगाई, कितने को जेल में डाल दिया गया, कईयों ने काले पानी की सजा तक झेली। उन महान पुरूषों के बलिदानों की देन है जो भारत आजाद हुआ। पर क्या आप जानते है की गुलाम भारत के उस दौर में जब अंग्रेजों का वर्चस्व हर तरफ था, ​तब इस महान पुरूष ने भारत के सरजमीं पर सबसे पहले देश का तिरंगा फहराया था

भारत को आजादी दिलाने के लिए सुभाष चन्द्र बोस ने 30 दिसंबर 1943 को पोर्ट ब्लेयर में आजाद हिंद फौज के साथ आजादी के झंडे को पहली बार फहराया था। आजाद हिंद फौज के गठन की बात करें तो इसकी नींव 1942 को रासबिहारी ने जापान में की थी। इस फौज में जापान में बंदी बनाए गए भारतीय सैनिकों को शामिल किया गया था, और इसमें बर्मा और मलाया में रहने वाले भारतीय स्वयंसेवकों को भी  शामिल किया गया था।

सुभाष चन्द्र बोस यह मानते थे कि भारत से अंग्रेजों के शासन को खत्म करने में जापान की सहायता कारगर साबित होगी। इस कारण उन्होंने द्वितीय युद्ध में जापान की मदद की। जापान भी भारत को आजादी दिलाने में सहायता कर रहा था। अखिरकार जापान ने अंग्रजों को हरा कर अंडमान निकोबार द्विप समूह को जीत लिया। सुभाष चन्द्र बोस ने 21 अक्टूबर 1943 में आजाद हिंद सरकार का गठन किया। सुभाष चन्द्र बोस के संबन्ध जापानियों के साथ काफी अच्छे थे,​ जिससे जापान ने सुभाष चन्द्र बोस की सरकार को अंडमान निकोबार द्वीप 7 नवंबर 1943 को दे ​दिया। इस तरह उन्होंने भारत के सरजमीं पर पहली बार 30 दिसम्बर 1943 में झंडे को फहराया गया।