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Exclusive: प्रशासन के निर्देशों को खुलेआम चुनौती दे रहा है यह निजी अस्पताल, नोटिस मिलने के बाद भी नहीं है कोई फर्क

वाराणसी। कोरोना के चलते पूरा देश लॉकडाउन हो रखा है वहीं इन दिनों कोरोना योद्धाओं के रूप में मैदान में पुलिस कर्मी, सफाई कर्मी और डॉक्टर्स के आलावा भी तमाम लोग जुटें हुए है लेकिन आपको बता दें कि ऐसी आपदा की घड़ी में बहुत से लोग अपने सामर्थ्य के साथ आगे बढ़ कर मदद कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ एक डॉक्टर ऐसे भी हैं जो अपनी जेबें भरने में लगे। ऐसी ही एक खबर को नेशनल विज़न ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था और वो खबर थी (लॉकडाउन में देवदूत जैसे शब्द को कलंकित कर रहे हैं कुछ एक डॉक्टर) जिसके बाद इस खबर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बी.बी. सिंह ने महमूरगंज स्थित  फ्रैक्चर क्लिनिक को नोटिस भी भेजा था। बावजूद इसके कि डॉक्टर मनमाने फीस को ना लें, उस अस्पताल में एक नया ही सिस्टंम लागू कर दिया है। 

बता दें कि इन दिनों लॉकडाउन के दौरान कुछ एक ही निजी अस्पताल हैं जो मरीजों को देख रहे हैं। उन्हीं में से हडडी का एक अस्पताल महमूरगंज में फ्रैक्चर क्लिनिक है, जहां डॉ. अभिनव अग्रवाल मरीजों को देखते हैं। लॉकडाउन के पहले डॉ अभिनव की फीस 500 थी लेकिन लॉकडाउन के बाद 1 अप्रैल को इनकी फीस 1000 रूपये हो गयी। इस बात को पूरे साक्ष्य के साथ नेशनल विज़न ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिसके बाद सीएमओ द्वारा नोटिस भेजने के बाद फीस का वो पेपर जो रिशेप्सन के पास लगा था वो हटा दिया गया मगर अभी भी फीस की बढ़ोतरी का खेल जारी है। चलिए आपको बताते हैं अब फ्रैक्चर क्लिनिक मरीजों से कैसे मनमाने फीस की उगाही कर रहा है। इसकी सच्चाई जानने के लिए नेशनल विज़न ने वहां चल रहे मनमाना फीस वसूलने के खेल पर अंकुश लगा कि नहीं इस बात की पड़ताल की तो जो बातें सामने आई उसको सुनकर आप भी हैरान रह जायेंगे।

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अस्पताल के मनमाने फीस को जब नेशनल विज़न ने प्रमुखता से दिखाया तो इस बाबत सीएमओ ने अस्पताल पर कार्रवाई करते हुए नोटिस भेजा।बावजूद इसके इस अस्पताल ने अपने मनमाने फीस वसूलने के लिए एकअलग ही पैंतरा अपना लिया। नेशनल विज़न की रिपोर्टर ने एक पेशेंट के परिजन को उस अस्पताल में भेजा जहां ऐसी बाते सामने आई कि आप भी सुनकर हैरान हो जायेंगे कि मानवता ताक पर रखकर देवदूत रूपी इस अस्पताल के डॉक्टर किस तरह से मरीजों को फीस के नाम पर लूट रहे हैं। पेशेंट के रिलेटिव ने जब रिशेप्सन पर बैठी महिला से बात कि तो पता चला कि सुबह के शिफ्ट में जूनियर डॉक्टर केस देखेंगे तो उनकी फीस 500 रूपये हैं और वहीं अगर सीनियर डॉक्टर यानि की डॉ. अभिनव को केस दिखाते हैं तो उनकी फीस 1000 रूपये होगी। आपको ये बता दें कि यही डॉ अभिनव की लॉक डाउन के पहले तक 500 फीस थी, जिसको बढ़ाकर इन्होंने 1000 रूपये कर दी और जब नोटिस तो मिली इन्होंने नया पैंतरा अपना लिया।

सोचने वाली बात है कि ऐसी घड़ी में कुछ लोग मानवता की मिसाल दे रहे हैं तो कुछ इस समय में अपनी जेबें भरने में लगे हुए हैं। उनको शर्म भी नहीं आ रही है, जो मरीज उतनी फीस बमुश्किल दे सकते हैं क्या उन लोगों से इतना फीस लेना जायज है। कुछ एक लोगों की वजह से अच्छे लोग भी संदेह के घेरे में आ जाते हैं। ऐसे लोगों का बस एक ही उसूल दिखाई देता है कि कैसे भी कर के बस पैसे अपनी जेब में आने चाहिए। ऐसे लोगों को ना तो प्रशासन का डर है और ना ही उनके नोटिस का खौफ। शायद इसीलिए ये फ्रैक्चर क्लिनिक बेखौफ पैसे कमाने में जुटा हुआ है उसे किसी का भी डर नहीं। नेशनल विज़न ने जिस खबर को पहले प्रमुखता से दिखाया था उसका लिंक भी ऊपर दिया गया है तो आप उस खबर को पढ़कर खुद ही फैसला करें कि ऐसे डॉक्टर और अस्पताल पर कैसी कार्रवाई होनी चाहिए।

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