वाराणसी

शहंशाह की यह मुस्तैदी महकमें के लिए बनी नज़ीर, बड़ी वारदात होने से बची

वाराणसी। जिले के एसएसपी अमित पाठक की तारीफ इन दिनों जमकर हो रही है। उनकी कार्यप्रणाली के सभी लोग कायल हो चुके हैं। शायद यही कारण है कि बनारस में अपराधियों के अंदर पुलिस का खौफ देखने को मिल रहा है। अपनी कार्यकुशलता के कारण वाराणसी पुलिस के सेनापति के सानिध्य में कई अपराधियों को सलाखों के पीछे और कईयों को एनकाउंटर में ढेर किया जा चुका है। क्राइम को लेकर जीरो टॉलरेंस रखने वाले ने एक बार फिर साबित किया है कि वह 24 घंटे ड्यूटी पर तैनात रहते हैं। बीती देर रात करीब 2 बजे एसएसपी का फोन बजा और उन्होंने खुद फोन उठाकर कार्रवाई की है।

प्रतापगढ़ के रहने वाले पेसे से पत्रकार धीरु सिंह ने वाराणसी के एसएसपी अमित पाठक के सीयूजी नंबर पर रात 2 बजे के आसपास फोन किया और यह जानकारी दी कि बाइक सवार कुछ सोहदे नेशनल हाईवे रामनगर पुल पर बारात की गाड़ियों का पीछा कर रहे हैं, जिसमें महिलाएं बैठी हैं। इस दौरान एसएसपी अमित पाठक ने खुद सीयूजी नंबर पर फोन उठाया और मौके पर अपने मातहतों को रवाना किया। धीरू ने बताया कि उन्होंने एसएसपी अमित पाठक के सीयूजी नंबर पर फोन करके यह पूछा कि क्या आप पीआरओ साहब बोल रहे हैं? तब उधर से स्वयं एसएसपी ने बताया कि नहीं वह एसएसपी अमित पाठक बात कर रहे हैं।

एसएसपी अमित पाठक की कार्यप्रणाली को देखकर यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से वह कानून व्यवस्था की मॉनिटरिंग करते हैं। पुलिस विभाग का एक बड़ा अधिकारी होने के बाद भी वह फरियादियों के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं। सरकार की तरफ से जारी सीयूजी नंबर पीआरओ नहीं बल्कि एसएसपी अमित पाठक खुद उठाते हैं। बीती रात एसएसपी के अलर्ट रहने के कारण बड़ी घटना होने से बच गई।

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