धर्म / ज्योतिष

सात शनिवार करें ये उपाय, शनिदेव होंगे प्रसन्न तो साढ़ेसाती भी नहीं करेगा आपको तंग

ब्यूरो रिपोर्ट। शनिवार के दिन यदि आप पूरे मन से शनिदेव की पूजा करते हैं तो आपको हर कष्ट से मुक्ति मिल सकती है। इसके साथ ही जिन लोगों पर साढ़ेसाती चल रही है वह भी सही हो जाता है। ऐसी मान्यता है कि शनि दोष से मुक्ति के लिए मूलनक्षत्र युक्त शनिवार से आरंभ करके सात शनिवार तक शनिदेव की पूजा करने से सभी तरह के परेशानियों से निजात मिल जाता है। वहीं,पूरे नियम के अनुसार पूजा और व्रत करने से भगवान शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और शीघ्र ही आपके सारे कष्ट दूर हो सकते हैं। आज हम आपको बताएंगे शनिदेव की पूजा करते समय किस तरह की विशेष बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

ज्योतिषविद विमल जैन ने बताया कि ज्योतिषशास्त्र में शनि को सभी ग्रहों में न्यायधीश का दर्जा प्राप्त है और यह सब को कर्मों का फल प्रदान करते हैं। ऐसे में शनि देव की पूजा करते समय कुछ नियमों को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है। सबसे पहले व्रत के दिन शनिवार को भोर में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर हनुमान जी और शनिदेव की आराधना करते हुए तिल और लौंग को जल में डालकर पीपल के पेड़ पर चढ़ाना चाहिए। उसके पश्चात शनिदेव की प्रतिमा के समीप बैठ कर उनका ध्यान लगाते हुए मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। जब पूजा संपन्न हो जाए तो काले वस्त्र और काली वस्तु को किसी गरीब को दान में देना चाहिए।  इसके अलावा यह याद रखना जरूरी है कि व्रत के अंतिम दिन शनिदेव के पूजा के साथ साथ हवन भी कराया जाना चाहिए।

शनिदेव को लोहे का बर्तन अधिक प्रिय है। शास्त्रों के अनुसार शनिदेव की पूजा में तांबे के बर्तनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि सूर्य और शनि पिता पुत्र होते हुए भी एक दूसरे के शत्रु माने गए हैं और तांबा सूर्य की धातु है। याद रखें कि शनिदेव की पूजा में लोहे के बर्तनों का ही इस्तेमाल करें। पूजा में दीपक भी लोहे या मिट्टी का ही जलाएं। लोहे के बर्तन में ही तेल भरे और फिर शनिदेव को चढ़ाएं।

इसके अलावा हर शनिवार को शनिदेव को काले तिल और काला उड़द भी चढ़ाएं। शनिदेव की पूजा में लाल रंग का प्रयोग निषेध है। उनकी पूजा में काले या नीले रंग की वस्तु का उपयोग करना शुभ माना गया है,साथ ही नीले रंग का फूल शनि देव को बहुत प्रिय है। शायद ही ये बात सभी को पता होगी कि शनिदेव की पूजा करते समय या शनि मंत्रों का जाप करने वाले व्यक्ति का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए। क्योंकि शनि देव को पश्चिम दिशा का स्वामी माना गया है तो इसलिए इस बात का ध्यान पूजा करने वाले को विशेष रूप में रखना बहुत जरूरी है।

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