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कोरोना अपडेट: तो क्या Covid-19 चीन के लैब में बना वायरस है,जाने हक़ीक़त

ब्यूरो रिपोर्ट। सोशल मीडिया पर कोरोनावायरस महामारी को लेकर तरह तरह के मैसेज वायरल हो रहे हैं। तथ्यात्मक तौर पर सही मैसेज लोगों को जागरूक कर रहे हैं, जबकि गलत मैसेज लोगों को गुमराह कर रहे हैं। इसी बीच व्हाट्सएप समेत कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक और मैसेज वायरल हो रहा है, जिसमें नोबेल पुरस्कार विजेता तासुकू हौजों के हवाले से कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस प्राकृतिक नहीं हैं बल्कि यह चीन की एक लैब में बनाया गया हैं तो आइये जानते हैं कि क्या है यह वायरल मैसेज ? क्या है वायरल मैसेज में किए गए दावे और क्या है इसकी सच्चाई ? तो सबसे पहले हम एक नजर डालते हैं सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उस मैसेज पर :

“नोबेल पुरस्कार जीतने वाले जापान के प्रोफेसर डॉ तासुकू हौजों ने मीडिया के सामने यह बोल कर सनसनी फैला दी है कि कोरोना वायरस प्राकृतिक नहीं है।यदि प्राकृतिक होता तो पूरी दुनिया में यह यूं ही नहीं तबाही मचाता। विश्व के हर देश में अलग-अलग टेंपरेचर होता है, यदि यह कोरोना वायरस प्राकृतिक होता तो चीन जैसे अन्य देश जहां चीन जैसा ही टेंपरेचर है या वातावरण है वही दबंगई मचाता। यह जिस तरह स्विजरलैंड जैसे ठंडे देश में फैल रहा है , उसी तरह रेगिस्तानी इलाकों में भी फैल रहा है। कोरोना वायरस आर्टिफिशियल है। यदि यह प्राकृतिक होता और ठंडे स्थानों पर फैलता तो गर्म स्थानों पर जाकर दम तोड़ देता। अनेकों जीव-जंतु और वायरस पर 40 साल रिसर्च किया है।  मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि यह वायरस प्राकृतिक नहीं है यह वायरस बनाया गया है। यह पूरी तरह से आर्टिफिशियल है।  चीन की वुहान लेबोरेटरी में मैंने 4 साल काम किया है। उस लेबोरेटरी के सारे स्टाफ से मैं पूरी तरह परिचित हूं। कोरोना हादसे के बाद से फोन लगा रहा हूं लेकिन सभी मेंबर्स के फ़ोन 3 महीने से बंद आ रहे हैं अब पता चल रहा है कि सारे टेक्नीशियन की मौत हो चुकी है। चीन झूठ बोल रहा है मेरी बातें सत्य होंगी। यदि गलत हुई तो सरकार मेरा नोबेल पुरस्कार वापस ले सकती है। मैं आज तक की अपनी सारी जानकारियों और रिसर्च के आधार पर यह शत-प्रतिशत दावे के साथ कह सकता हूं कि कोरोना प्राकृतिक नहीं है और यह चमगादड़ से नहीं फैला। यह चीन ने बनाया है जो मैं आज बोल रहा हूं यदि यह बात आज या मेरे मरने के बाद भी झूठी हो तो मेरा नोबेल पुरस्कार सरकार वापस ले सकती है, परंतु एक बार मैं फिर कह रहा हूं कि चीन झूठ बोल रहा है और यह सच्चाई एक दिन सबके सामने जरूर आएगी”।

जापान के क्योटो में जन्में तासुकु हौजों को 2018 में फिजियोलॉजी या मेडिसिन में प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार मिला था। वायरल मैसेज में यह दावा किया गया है कि तासुकू हौजों ने 4 साल वुहान की लेबोरेटरी में काम किया जबकि यह पूरी तरह गलत है।

नाम: तासुकु होंजो
जन्म: 27 जनवरी 1942 , क्योटो ,जापान
पुरस्कार: द नोबेल प्राइज इन फिजियोलाजी या मेडिसिन  2018
पुरस्कार के समय संबद्धता: क्योटो विश्वविद्यालय,क्योटो, जापान
पुरस्कार प्रेरणा: “नकारात्मक प्रतिरक्षा विनियमन के निषेध द्वारा कैंसर चिकित्सा की उनकी खोज के लिए।”

नोबेल प्राइज की वेबसाइट ( www.nobelprize.org ) पर उनकी जो प्रोफाइल दी गई है उसमें यह कहीं भी नहीं लिखा गया है कि वह 4 साल तक चीन में वुहान की लेबोरेटरी में रहे। यही नहीं क्योटो यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूटऑ फ एडवांस्ड स्टडी की वेबसाइट ( https://kuias.kyoto-u.ac.jp/e/profile/honjo ) पर उनकी पूरे प्रोफेशनल करियर का व्योरा है।  उसमें भी कहीं नहीं लिखा है कि उन्होंने 4 साल तक चीन की वुहान  लेबोरेटरी में काम किया हैं। इसके अलावा उन्होंने अभी तक कहीं भी यह बयान नहीं दिया है कि कोरोना वायरस चीन की वुहान लेबोरेटरी में बना है या उन्होंने वुहान के स्टाफ को कभी फ़ोन किया था। ऐसे में यह कहा जा सकता हैं कि यह सब पूरी तरह से झूठ है इस तरह की खबरें कहीं भी नहीं है। यह सभी बातें तथ्यात्मक तौर पर झूठ साबित होती हैं।

इसके पहले भी और भी वैज्ञानिकों ने चीन पर कोरोना वायरस बनाने का आरोप लगाया है, उसी में से एक फ्रांस के नोबेल पुरस्कार विजेता ल्युक मान्टैग्नियर ने कुछ दिनों पहले यह दावा किया था कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति किसी लैब में की गई है और यह इंसानों के द्वारा बनाया गया वायरस हैं  लेकिन इसकी अभी तक किसी प्रकार से कोई पुष्टि नहीं हो पाई है। हालांकि पूरी जांच के बाद ये खबर गलत पाई गयी है।

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