अपना देश

कोरोना अपडेट: अगला 10 दिन आर या पार, हो जाएं सावधान !

ब्यूरो रिपोर्ट। अगले 10 दिन में अगर हुई लापरवाही तो यकीनन कोरोना देश में ला देगा तबाही। इस अलर्ट का मकसद आपको डराना नहीं बल्कि कोरोना के खतरे से लोगों को रूबरू करवाना है। क्योंकि शायद देश में कुछ लोग यह गलतफहमी पाले बैठे हैं कि लाकडाउन खत्म होते ही कोरोना वायरस का खतरा पूरी तरह से टल जाएगा। भारत में अन्य देशों के मुकाबले कम मौतों का आंकड़ा यकीनन इस ओर इशारा करता है कि लगभग सब कुछ कंट्रोल में है। अगर आप भी कुछ ऐसा ही सोच रहे हैं तो ज़रा ठहरिये जनाब! अगर आप ने अब थोड़ी सी भी लापरवाही की तो यह आपकी सबसे बड़ी गलतफहमी भी साबित हो सकती हैं। इन्हीं गलतफहमियों को दूर करने के लिए पेश है हमारे संवाददाता श्रीकांत चतुर्वेदी की यह खास रिपोर्ट :

हालांकि अभी तक लाकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग कोरोना से लड़ने का सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र साबित हुआ है। जिसका पालन देश के अधिकतर लोग कर भी रहे हैं। इन सब के बीच हमारे मन में कोरोना को लेकर कई सवालात उठने लगे हैं। जब हमने 30 जनवरी से 25 अप्रैल तक के बीच कोरोना के बदलते चाल पर नजर डाला तो यह निष्कर्ष सामने आया अगर अगले 10 दिन तक हम लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का कड़ाई से पालन कर लेते हैं तो कोरोना को अपने देश में थर्ड स्टेज या पीक पर जाने से रोक लेंगे। लेकिन वहीँ अगर हम आने वाले 10 दिन में नाम मात्र की भी लापरवाही करते हैं तो तो कोरोना को थर्ड स्टेज या पीक पर जाने से रोक नहीं सकता है, और तबाही का एक भयंकर मंजर खुद हमारे ऊपर होगा। आइये अब आपको बता दूं 30 जनवरी से 25 अप्रैल यानी 2 महीने 25 दिन के अंदर देखते ही देखते भारत में कोरोना वायरस के कुल मामले 01 से 24942 तक पहुंच गए यानी औसतन रोजाना भारत में 265 मामले सामने आते गए। यह आंकड़ा बताता है कि कोरोना के मामले बहुत हद तक रोके तो गए लेकिन अब अगले 10 दिनों में किसी के द्वारा की गयी थोड़ी भी लापरवाही कोरोना को थर्ड स्टेज या पीक तक पहुंचा सकता है। आइये एक नजर इस ग्राफ पर डालते हैं।

जैसा कि हम देख सकते हैं कि 30 जनवरी  को भारत में कोरोना वायरस का केस मिला था तो वहीं मात्र 4 हफ्ते बाद 29 फरवरी तक केवल 3 केस उसके और 4 हफ्ते बाद यानी 29 मार्च को यह आंकड़ा 1024 तक पहुंच गया फिर 29 मार्च से सिर्फ 2 हफ्ते और यानी 13 अप्रैल तक यह आंकड़ा 10024 तक पहुंच गया फिर 13 अप्रैल से मात्र 10 दिन यानी 23 अप्रैल तक यह आंकड़ा 21700 तक पहुंच गया है। भले ही ग्राफ की रफ्तार दोगुनी नजर आए लेकिन इसी कड़ी में भारत में कोरोनावायरस की रफ्तार भी पहले से 24 गुना बढ़ गई है लेकिन चिंता की बात यह भी है कि इस बीच कोरोना वायरस की संख्या भी पहले के मुकाबले 16 गुना ज्यादा बढ़ गया है।

इसी तरह दूसरा सवाल ये उठता है कि क्या भारत में मौतों की संख्या का कम होना कोरोना के कमजोर होने का इशारा है तो मैं आपको बता दूं कि 23 मार्च को भारत में कुल आठ मौतें हुई जो कुल मामलों का 1 फीसदी थी जबकि केवल 4 हफ्ते बाद ही 25 अप्रैल को यह बढ़कर 780 तक पहुंच गया जो कुल मामलों का 3.16 फीसदी ही था, यानी मोटे तौर पर देखा जाये तो इन आंकड़ों में पिछले चार हफ्तों में सीधे तौर पर 2.50 फीसदी का इजाफा देखने को मिल रहा हैं। हालांकि यह कहना अभी गलत होगा कि भारत का यह आंकड़ा अभी अपने ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। अगर हम जरा सी भी अब लापरवाही बरतते हैं तो इसे पीक पर पहुंचने में कोई रोक नहीं पायेगा। जैसा कि पश्चिमी देशों में इन दिनों देखने को मिल रहा हैं। ऐसे में चाहे सरकार हो या फिर आम आदमी सभी के पास मात्र और मात्र एक विकल्प शेष बचता है और वह है सोशल डिस्टेंसिंग, ज्यादा से ज्यादा घरों में रहना, मास्क का हर वक्त इस्तेमाल करना, सैनिटाइजर का प्रयोग करना और जितना हो सके उतना एहतियात बरतना।

Click to comment

You must be logged in to post a comment Login

Leave a Reply

Most Popular

To Top