वाराणसी। जनपद में फ्रंट लाइन कोरोना वॉरियर पुलिसकर्मी भी कोरोना संक्रमित हो रहे हैं। बुधवार को कोरोना संक्रमित कॉन्स्टेबल मनोज पांडेय की बीएचयू अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गयी। इस सूचना के बाद जिला प्रशासन /पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। वहीं मनोज पाण्डेय के मौत पर इलाज में डॉंक्टरों के लापरवाही की बात सामने आई थी, जिसके बाद डीएम कौशल राज शर्मा तीन सदस्यीय जांच समिति गठित किए, जहां आज तीन सदस्यीय जांच समिति द्वारा रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दिया गया।

जांच समिति ने मरीज मनोज के पं0दीन दयाल राजकीय चिकित्सालय, बीएचयू, पैथालाजी रिपोर्ट, इलाज करने वाले डाक्टरों का बयान, तथा बीएचयू से प्राप्त केस समरी व बीएचटी की जाॅच पडताल की। बता दें कि कांस्टेबल मनोज 23 जुलाई को सायं 8.30 बजे पण्डित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय वाराणसी में कोविड पाजिटिव मरीज के रूप में भर्ती हुए थे । रिपोर्ट के आधार पर समिति ने पाया कि मरीज उच्च रक्तचाप एवं डायबिटीज(शुगर) की बीमारी से ग्रस्त था तथा उनके द्वारा विगत 10 वर्षों से शराब का सेवन किया जा रहा था।

मरीज को कोविड की निर्धारित दवायें यथा एजिथ्रोमाइसीन, विटामिन सी, विटामिन बी, पैरासीटामाल, ओमेप्राजोल दी गई थी । उपचार के दौरान हर शिफ्ट में मरीज की नाडी, तामना, एस0पी0ओ0टू लगातार किया जाता रहा। 28.जुलाई तक मरीज का एसपीओटू, तापमान, नाडी सामान्य रहा। कोविड के मरीजों में डायबिटीज एवं उच्च रक्तचाप रहने पर मरीज हाईरिस्क कैटेगरी में होता है तथा वह मल्टी आरगन फेल्योर में चले जाते हैं।जांच समिति ने निष्कर्ष में दिया है कि मनोज की मृत्यु की जाॅच में पाया गया कि वह डायबिटीज एवं उच्च रक्तचाप के पुराने मरीज थे और शराब के भी आदी थे। तथा दोनो अस्पतालों मे डायबिटीज, उच्च रक्तचाप एवं कोरोना का इलाज किया गया । इसमें किसी भी प्रकार से चिकित्सकीय लापरवाही नहीं पायी गयी। हालांकि नेशनल विजन ने अपनी खबर में बताया था कि डॉक्टरों की लापरवाही से नहीं बल्कि मनोज पाण्डेय की मौत उनकी बीमारी के कारण ही हुआ था। वहीं एकबार फिर नेशनल विजन की खबर पर मुहर लग गयी।

कांस्टेबल मनोज पाण्डेय की मौत का मामला, जांच समिति की आई रिपोर्ट,एकबार फिर नेशनल विजन की खबर पर लगी मुहर
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