CHRISTMAS: इसलिए हर साल सजाया जाता है क्रिसमस TREE…

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ब्यूरो रिपोर्ट। बड़ा दिन यानि की क्रिसमस का त्यौहार, हर साल 25 दिसम्बर को ईसाई धर्म का बड़ा त्यौहार क्रिसमस मनाया जाता है। तीन दिनों तक प्रभु ईशु के जन्म को लेकर पूरी दुनिया में इसकी धूम दिखाई देती है। विदेशों में इस पर्व को बहुत ही हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन अब भारत में भी इस पर्व को लोगों द्वारा मनाया जाने लगा है। हर साल क्रिसमस पर क्रिसमस ट्री सजाने का प्रचलन है पर क्या आप जानते हैं कि इस दिन ऐसा क्यों किया जाता है। आज हम आपको दुनिया भर में इससे जुड़ी अनेक मान्यताएं और कहानियां जो प्रचलित हैं उनके बारे में बताने जा रहे हैं –

क्रिसमस ट्री को सनोबर के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऐसा पेड़ है जो कभी नहीं मुरझाता और बर्फ में भी हमेशा हरा भरा रहता है। क्रिसमस ट्री आमतौर पर डगलस, बालसम या फर का पौधा होता है, जिस पर क्रिसमस के दिन बहुत सजावट की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस प्रथा की शुरूआत प्राचीन काल में मिस्रवासियों, चीनियों या हिबू्र लोगों ने की थी।दरअसल आधुनिक क्रिसमस ट्री की शुरूआत पश्चिम जर्मनी में हुई।

मध्यकाल में एक लोकप्रिय नाटक के मंचन के दौरान ईडन गार्डन को दिखाने के लिए फर के पौधों का प्रयोग किया गया जिस पर सेब लटकाए गए।यूरोप वासी भी सदाबहार पेड़ों से घरों को सजाते थे। ये लोग इस सदाबहार पेड़ की मालाओं, पुष्पहारों को जीवन की निरंतरता का प्रतीक मानते थे। उनका विश्वास था कि इन पौधों को घरों में सजाने से बुरी आत्माएं दूर रहती हैं। उसके बाद जर्मनी के लोगों ने 24 दिसम्बर को फर के पेड़ों से अपने घर की सजावट करनी शुरू कर दी। इस पर रंगीन पत्रियों, कागजों और लकड़ी के तिकोने तख्ते सजाए जाते थे।विक्टोरिया काल में इन पर मोमबत्तियों, टॉफियों और बढिय़ा किस्म के केकों को रिबन और कागज की पट्टियों से पेड़ पर बांधा जाता था।

क्रिसमस ट्री को सजाने के साथ ही इसमें खाने की चीजें रखने जैसे सोने के वर्क में लिपटे सेब, जिंजरब्रैड की भी परम्परा है। इंगलैंड में प्रिंस अल्बर्ट ने 1841 ईस्वी में विंडसर कैसल में पहला क्रिसमस ट्री लगाया था।वैसे सदाबहार झाडिय़ों और पेड़ों को ईसा युग से पहले से ही पवित्र माना जाता रहा है। क्रिसमस ट्री सजाने के पीछे घर के बच्चों की उम्र लंबी होने की मान्यता भी प्रचलित है। इसी वजह से क्रिसमस पर इसे सजाया जाता है। दुनिया का सबसे बड़ा कृत्रिम क्रिसमस ट्री श्रीलंका में है यह क्रिसमस ट्री कृत्रिम है और इसे श्रीलंका के कोलम्बो में गॉल फेस ग्रीन पर बनाया गया था। यह 72.1 मीटर ऊंचा है जिसे स्टील, तार फ्रेम, स्क्रैप धातु और लकड़ी से बनाया गया है। इसमें 6 लाख एल.ई.डी. बल्ब लगाए गए हैं।

यही नहीं एक और मान्यता के अनुसार हजारों साल पहले उत्तर यूरोप में क्रिसमस के मौके सनोबर के पेड़ को सजाने की शुरूआत हुई थी। तब इसे चेन की मदद से घर के बाहर लटकाया जाता था। ऐसे लोग जो पेड़ खरीद नहीं सकते थे वे लकड़ी को पिरामिड का आकार देकर क्रिसमस ट्री के रूप में सजाते थे। अनूठे क्रिसमस ट्री वर्ष 2015 में लिथुआनिया की राजधानी विलनियस में ऐसा क्रिसमस ट्री बनाया गया, जिसमें प्रवेश करने पर आपको परीलोक जैसा अहसास हो। एक बार लंदन में एक ऐसा क्रिसमस ट्री बनाया गया, जिसकी तस्वीरों ने पूरी दुनिया के बच्चों का मन मोह लिया। 14 मीटर ऊंचे इस विशालकाय क्रिसमस ट्री को बनाने में दो हजार आकर्षक खिलौने इस्तेमाल किए गए थे।

दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में साल 2014 में रोड्रिगो डी फ्रीटस झील में तैरता हुआ खूबसूरत क्रिसमस ट्री बनाया गया था। नॉर्वे के डोर्टमंड में जगमग करते 45 मीटर ऊंचे क्रिसमस ट्री को बनाने में कारीगरों को एक महीना लगा। इसे 1700 स्प्रूस ट्री को जोड़कर बनाया गया था और फिर इसके चारों तरफ शानदार लाइटिंग की गई थी।वर्ष 2016 में संयुक्त अरब अमीरात में अबू धाबी के होटल अमीरात पैलेस होटल में सजाया गया क्रिसमस ट्री करोड़ों रुपए के हीरे-जवाहरात और स्वर्ण आभूषणों से सजा खास ट्री था।