‘CAB’ का मुद्दा गहराया, राज्यसभा में सरकार की अंतिम परीक्षा 

0
66

रिपोर्ट -अंकित सिंह

ब्यूरो डेस्क। नागरिकता संशोधन विधेयक को सरकार आज राज्यसभा में पेश करेगी। सरकार इस विधेयक को पारित  कराने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रही है।सोमवार को यह विधेयक लोक सभा में 311 vs 80 के बड़े अंतर से पास हुआ।अब नागरिकता संशोधन बिल को राज्यसभा से पास करवाने के लिए सरकार के रणनीतिकारों ने कई बैठकें की हैं। इस प्रयास में जुटी हुई हैं कि किसी तरह अधिक से अधिक बहुमत अपने पक्ष में किया जाए।हालांकि सरकार राज्यसभा में अपनी संख्याबल को लेकर ज्यादा परेशान दिख नहीं रही है। उधर,विपक्ष यह प्रयास में लगा हैं कि इस बिल को किसी तरह राज्यसभा में पास न होने दिया जाए। यह अनुमान लगाया जा रहा हैं कि नागरिकता संशोधन विधेयक को  दोपहर के बाद राज्यसभा में मोदी सरकार पेश कर सकती है। 

क्या कहता है राज्यसभा का अंकगणित 
बीजेपी सरकार जहां लोकसभा में 303 सदस्यों के साथ 311 सांसदों का समर्थन हासिल किया, वहीं यह ताकत राज्यसभा में कुछ कम है| राज्यसभा में कुल 245 सीट है और वर्तमान समय में 240 सीट है। नागरिकता संशोधन बिल को पास कराने के लिए 121 सीटों की जरुरत है। इस समर्थन के बिल में जहां के भाजपा  83 ,अन्नाद्रमुक 11,बीजद 7,जदयू 6,अकाली 3, मनोनीत 4 एवं अन्य 11 है,जो कुल 125 सदस्य होते है।अभी शिवसेना का राज्यसभा में बिल के समर्थन में असमंजस बना हुआ है,जिसकी राज्यसभा में 3 सदस्य है। अब यह देखना होगा कि शिवसेना बिल का लोकसभा के जैसे राज्यसभा में समर्थन करती है या विरोध करती है। विपक्ष में कांग्रेस 46,टीएमसी 13,सपा 9,राजद,एनसीपी और बसपा के पास 4-4 सदस्य हैं तो माकपा और डीएमके के 5-5 सदस्य हैं, टीआरएस 6,आप 3,के अलावा मुस्लिम लीग,भाकपा और जेडीएस के 1-1 सदस्य राज्यसभा मे हैं। इसके अलावा और भी कई पार्टी विरोध में वोटिंग कर सकती है। इस बिल को राज्यसभा में बहुमत साबित करने के लिए जो संख्या चाहिए उससे एनडीए ज्यादा दिख रही है। इसके साथ ही बीजेपी ने अपने सभी सदस्यों से आज राज्य सभा में मौजूद रहने कहा है। वोटिंग के दौरान कुछ सांसद वॉकआउट करते है तो बहुमत का आकड़ा कम हो जाएगा,वहीं पुर्वोत्तर के दो सांसदों को शामिल नहीं किया गया है,तो कांग्रेस के मोतीलाल वोरा बीमार है,जिसके चलते वह अनुपस्थित रह सकते है।

शिवसेना बदल सकती है अपना मूड तो जदयू में भी बढ़ा मतभेद
शिवसेना ने लोकसभा में नागरिक संशोधन बिल का समर्थन किया ,जिसके बाद महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से सरकार चला रही शिवसेना ने मंगलवार को यू- टर्न लेकर असमंजस बढ़ा दिया है। शिवसेना जो अपने को हिन्दू समुदाय का सबसे बड़ा  हितैषी कहता है। अगर वह इस बिल के विरोध में वोटिंग करता है तो यह एक बड़ा बदलाव शिवसेना के इतिहास में होगा। बाल ठाकरे द्वारा शिवसेना का स्थापना ही हिन्दू समुदाय के हित को लेकर हीं  किया गया था। कट्टर हिन्दू सोच के कारण बाल ठाकरे हमेशा चर्चा में रहे, लेकिन समय के बदलते दौर में और राजनीति में नये दोस्तों के साथ दोस्ती ने शायद उनके बेटे उद्धव ठाकरे के सोच में बदलाव लाया है, उधर,उद्धव ठाकरे का कहना है कि शिवसेना राज्यसभा में बिल का तब तक समर्थन नहीं करेगी, जब तक लोकसभा में सरकार इस बिल पर उठ रहे सवालों का जवाब नहीं देती।

इसके अलावा जदयू में भी बिल के विरोध में आवाज उठने लगे है। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर और महासचिव पवन शर्मा ने ट्वीट कर बिल के समर्थन में पुनः विचार करने के लिए कहा लेकिन पार्टी के द्वारा अभी किसी तरह का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। अब तो यह कुछ घंटो के बाद ही पता चलेगा कि कौन समर्थन में है और कौन विरोध।

क्या है कहना CAB बिल से जुड़े जानकारों का
इस बिल से जुड़े जानकारों का कहना है कि अगर यह बिल राज्यसभा में पास भी हो गया तो विपक्ष इसकी समीझा प्रवर समिति यानि की सेलेक्ट कमेटी से करवाने के लिए दबाव डाल  सकती है। प्रवर समिति उसे कहते है जो संसद के अंदर अलग- अलग मंत्रालयों की एक स्थायी समिति होती है,जिसे प्रवर समिति या स्टैंडिग कमेटी कहते हैं। इसमें सभी पार्टी के लोग शामिल होते हैं। इसका कोई मंत्री सदस्य नहीं होता है। काम खत्म होने के बाद इस कमेटी को भंग कर दिया जाता है।इस कमेटी का गठन स्पीकर या सदन के चेयरपर्सन के द्वारा किया जाता है।