वाराणसी। गुनाह किसी और का और सजा कोई और काट रहा है। ऐसा ही मामला वाराणसी में चल रहा था, लेकिन गुरुवार को पुलिस ने एक अनसुलझे ट्रिपल मर्डर केस की गुत्थी सुलझा ली है। एसएसपी अमित पाठक ने पूरे प्रकरण का खुलासा किया और बताया कि करीब 1 साल पहले हत्या में कुछ बेगुनाह लोग जेल चले गए थे। इसके बाद पुलिस ने इस अनसुलझी पहेली को हल कर लिया है और वास्तविक गुनाहगारों को पुलिस ने धर दबोचा है।

दरअसल करीब 1 साल पहले ट्रिपल मर्डर में 3 बेगुनाह जेल में सजा काट रहे हैं, लेकिन पुलिस ने पूरे प्रकरण का पर्दाफाश करते हुए असली गुनहगारों को पकड़ लिया है। एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि बीते साल मंडुवाडीह क्षेत्र के सुमित श्रीवास्तव 4.73 लाख का लोन पास कराया था । उसने अपने दोस्त नीलकंठ उर्फ शिवम को इसकी जानकारी दी और नीलकंठ ने कंप्यूटर दुकान के मालिक अभिषेक जायसवाल को यह बात बताएं जो एमएससी पास है। अभिषेक ने अपने बीटेक पास दोस्त सौरभ उर्फ लालू से कहा और पैसे हथियाने की जुगत में जुट गया। क्योंकि सुमित एलआईसी का भी काम करता था, इसलिए नीलकंठ के माध्यम से सुमित को विकास लेकर रोहनिया क्षेत्र स्थित ट्यूबवेल पर बुलाया।

वहां उन्होंने मोबाइल, एटीएम और आधार कार्ड छीनने के बाद उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। उसके बाद आरोपियों ने शव को मिर्जापुर के राजगढ़ जंगल में फेंक दिया। इस दौरान सुमित के खाते से पैसा निकालने की कोशिश हुई लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। उधर सौरभ ने अपने दोस्त राजू और ब्रिजेश के खाते में सुमित के पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए, ताकि पुलिस को लगे कि सुमित जिंदा है। खाते के ट्रांजैक्शन के आधार पर पुलिस ने राजू और बृजेश को बुलाना शुरू किया तो पोल खुलने के डर से आरोपियों ने उनकी हत्या कर दी। बृजेश का शव रोहनिया क्षेत्र में गंगा से बरामद हुआ लेकिन राजू का शव आज तक बरामद नहीं हो सका।

एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि मास्टरमाइंड अभिषेक बैंक कर्मी नीलकंठ उसका सहयोगी पंकज ट्यूबवेल मालिक विकास पटेल मजदूर शशिकांत उर्फ जवानी और ड्राइवर राम विलास पटेल को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनके पास से 2.48 लाख रुपए बरामद हुए हैं, जबकि 1.62 लाख बैंक में ही फ्रीज करवाया गया है। इसमें मास्टरमाइंड सौरव और उसके दोस्त सोनू की तलाश की जा रही है।

रियल गुडवर्क: वाराणसी में ब्लाइंड ट्रिपल मर्डर का खुलासा, कप्तान अमित पाठक का शानदार आगाज, आगे और भी हो सकते है बड़े खुलासे
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